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योग दिवस की शुभ प्राची में

विश्व पटल पर अगणित होकर
कोटि कोटि नव योगी बनकर
वसुधैव कुटुंबकम रूपम
स्वप्न हमारा योग दिवस की
शुभ प्राची में सच सा ही प्रतीत होता है ।

भारत स्वयं ही जनक योग का
करे निवारण रोग रोग का
निज संस्कृति घोतक स्वरुप
आरोग्य प्रदायक विश्व शांति के हित
अर्पण करने का श्रेय लेने को मनोनीत होता है

विश्व गुरु वाली वह संज्ञा
केवल संज्ञा भर न रह कर
ज्ञान ज्योति जवाजल्यमान हो
पुनः विश्व तम को हरने का दम भरकर
भारत अपना परचम फहरा देने को तत्पर होता है

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Aditya Kumar 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 13, 2015 at 4:12pm

आप इसी मंच पर भारतीय छन्द विधान समूह में पोस्ट हुए कुछ आलेख देख पाये हैं क्या ? आप उस समूह में कई तरह के आलेख देखेंगे. शीर्षक देखिये और आवश्यकतानुसार अध्ययन कीजिये. 

Comment by Aditya Kumar on July 13, 2015 at 3:22pm

जी आदरणीय अग्रज श्री   Saurabh Pandey जी, प्रयास कर रहा हूँ।  आप मुझे इतना बता दीजिये की मात्राएँ कैसे गिनते हैं और गुरु लघु क्या होते है।  मैंने बारह्वी तक हिंदी में पढ़े तो थे पर अब तोह बिलकुल भूल गया हूँ।  कोई हिंदी व्याकरण , छंद विधान आदि पर समग्र पुस्तक हो तो अवश्य ही बताएं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2015 at 11:07pm

यह प्रस्तुति प्रभावित नहीं कर पायी, भाई आदित्य जी.  पिछली रचना कुछ सही थी. आप पद्य वधा परध्यान केन्द्रित करें.

शुभेच्छाएँ

सही अक्षरी है,  ज्वाजल्यमान

Comment by Aditya Kumar on June 24, 2015 at 6:18pm

हार्दिक धन्यवाद श्रीमान Hari Prakash Dubey  जी 

Comment by Hari Prakash Dubey on June 24, 2015 at 5:59pm

सुन्दर  प्रयास  आ. Aditya Kumar  जी  , बधाई  !

Comment by Aditya Kumar on June 24, 2015 at 5:06pm

जी आदरणीय अग्रज श्री गिरिराज भंडारी जी वो गलती से हो गया, मै सुधार दूंगा इसे। सराहना के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2015 at 4:57pm

आ. आदित्य भाई , बहुत सुन्दर , हार्दिक बधाइयाँ ।

शायद  -- जाजल्व्य मान , सही है क्या ? देख लीजियेगा

Comment by Aditya Kumar on June 24, 2015 at 2:52pm

Sadar Dhanyawad aadarneey shri  MUKESH SRIVASTAVA Ji 

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on June 24, 2015 at 12:43pm

sundar

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