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रंग सारे हैं जहाँ हैं तितलियाँ (ग़ज़ल)

बह्र : २१२२ २१२२ २१२

 

रंग सारे हैं जहाँ हैं तितलियाँ

पर न रंगों की दुकाँ हैं तितलियाँ

 

गुनगुनाता है चमन इनके किये

फूल पत्तों की जुबाँ हैं तितलियाँ

 

पंख देखे, रंग देखे, और? बस!

आपने देखी कहाँ हैं तितलियाँ

 

दिल के बच्चे को ज़रा समझाइए

आने वाले कल की माँ हैं तितलियाँ

 

बंद कर आँखों को क्षण भर देखिए

रोशनी का कारवाँ हैं तितलियाँ

 ------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 853

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 29, 2016 at 1:08am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय जान गोरखपुरी साहब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 29, 2016 at 1:07am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवि शुक्ला जी

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on September 19, 2016 at 10:17pm
वाह्ह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह् उद्भुत,अतुलनीय,अविस्मरणीय,बहुत बहुत बहुत बधाई।
Comment by Ravi Shukla on September 19, 2016 at 9:49pm
वाह वाह आदरणीय धर्मेन्द्र जी किटनिंसादगी ऐ एक उम्दा ग़ज़ल कह दी आपने
पंख देकेहे रंग देखें और बस
आपने देखी कहाँ है तितलियाँ। बहुत खूब दिल से बधाई लीजिये
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 19, 2016 at 7:15pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सुरेश कुमार जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 19, 2016 at 7:14pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 19, 2016 at 7:14pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय जयनित जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 19, 2016 at 7:14pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on September 18, 2016 at 3:49pm
वाह आदरणीय धर्मेंद्र जी वक्त की मांग को पूरा करती रचना के लिए हार्दिक बधाई । सादर ।
Comment by Samar kabeer on September 18, 2016 at 3:43pm
जनाब धर्मेंद्र कुमार जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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