For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

होप और स्कोप (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

काफी समय बीत चुका था, कोठी की दूसरी मंज़िल में बैठे तीनों युवकों को अब तक कुछ भी मन का हासिल नहीं हो सका था। उनमें से एक बोला- "मैंने पहले ही कहा था कि यहाँ कोई स्कोप नहीं है, सारी मेहनत बेकार गई न!"

दूसरे ने कहा- "मैंने भी कई बार वहां के चक्कर लगा लिये, न तो कैमरे के लिए कोई मसाला मिला और न ही भीड़ को भड़काने का कोई मौक़ा! क्या अपलोड करेंगे हम इन्टरनेट पर?"

तीसरे ने तालाब किनारे स्थित उस कोठी की खिड़की से झांकते हुए कहा- "ये तो सामान्य धर्म-भीरू या कट्टर लोगों का जमावड़ा है, न अपने मतलब के स्नान और न अपने मतलब के पहनावे! लाईट्स, दूरबीनों और कैमरों का इन्तज़ाम बेकार गया!"

"आ गई समझ में न! ये पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालु लोग ऐसे ही होते हैं, चलो किसी और जगह चलते हैं!" पहले युवक ने अपना सामान समेटते हुए कहा।

"हाँ, जहां अपने हिसाब के मॉडर्न लोगों का जमावड़ा हो, जो वायरल होना चाहते हैं इन्टरनेट पर!" दूसरे युवक ने तीसरे के कंधे पर हाथ मारते हुए कहा।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 808

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 21, 2016 at 5:05pm
रचना पटल पर समय देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोरे जी।
Comment by vijay nikore on November 9, 2016 at 6:23am

बहुत ही सुन्दर लघुकथा लिखी है। हार्दिक बधाई, आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 8, 2016 at 4:21pm
यह रचना पसंद करने व स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय तेज वीर सिंह जी व आदरणीय महेन्द्र कुमार जी।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 8, 2016 at 4:19pm
मेरी इस ब्लोग पोस्ट पर उपस्थित हो कर अनुमोदन व अपने विचार साझा करने के लिए और मेरी हौसला अफ़ज़ाई हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।
Comment by Mahendra Kumar on November 7, 2016 at 9:36am
हार्दिक बधाई आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी। बढ़िया लघुकथा।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 7, 2016 at 8:10am
सामान्य वर्ग के लोग , इन पर तो मीडिया का कैमरा भी आँख नहीं उठाता। मीडिया तो उन पर लाइट फेंकता है जो पहले से चमक रहे होते हैं। क्या खाया , क्या पिया , कहाँ नहाये , कैसे नहाये , लॉ एंड आर्डर की कितनी प्रॉब्लम आई। कितनी भीड़ आई। बहुत सही विषय पर ध्यान गया , आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी , बधाई सादर।
Comment by TEJ VEER SINGH on November 6, 2016 at 8:59pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी।बेहतरीन प्रस्तुति।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2016 at 4:19pm
रचना पर समय देकर अनुमोदन व स्नेहिल प्रोत्साहन देने के लिए बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद आदरणीय सुशील सरना साहब।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2016 at 4:18pm
सब इत्तेफ़ाक़ की बात है। आज ही सुबह अपनी मिट्ठू वाली उस लघुकथा पर आपकी टिप्पणी का जवाब मैंने दिया है। मोहतरम जनाब समर कबीर साहब। बड़ी ख़ुशी हासिल होती है आपकी सक्रियता मंचों पर देख कर। इस ब्लोग पोस्ट पर भी आपकी स्नेहिल उपस्थिति व हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब।
Comment by Samar kabeer on November 6, 2016 at 3:09pm
जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब,बहुत अच्छी लगी आपकी ये लघुकथा भी,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
आप अपनी इससे पहले वाली रचना पर पलट कर नहीं आये,क्या बात है भाई ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
yesterday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service