For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बोलते नोट (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"नहीं भाई, ग़लती पर तुम हो, यह औरत नहीं!" दुकान में खड़े शिक्षक ने दुकानदार से कहा- "ऐसे समय में जबकि लोग राष्ट्रीय मुद्रा के पुराने अमान्य नोटों को सरकारी आदेशानुसार बैंक में जमा करने के बजाय जलाकर या फेंक कर मुद्रा का अपमान कर रहे हैं, इस औरत ने दस रुपये के इस ज़रा से फटे नोट की अपनी सुविधा व सूझबूझ से रक्षा ही की है पन्नी (पोलीथिन पाउच) में रखकर! नम्बर व ज़रूरी चीज़ें तो स्पष्ट हैं न इस नोट में! यह नोट तुम्हें स्वीकार करना चाहिए न!"

"मासाब, एक बार की बात नहीं, ये लोग तो हमेशा ही ऐसे नोट लाते हैं, ये नोट ये ही संभाल सकते हैं, हम नहीं!"

"सही कहा तुमने, न संभाल सकते हो, न ही इन लोगों को समझ सकते हो! लेकिन उनके ये नोट अगर इनकी दास्तां बयान करते हैं, तो हमारी पोल भी तो खोलते हैं!" शिक्षक ने उस औरत को दस रुपये का अच्छा नोट देकर वह पुराना कुछ फटा सा नोट लेते हुए कहा।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 534

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 21, 2016 at 5:02pm
मेरी इस लघुकथा के अवलोकन व अपनी राय देकर प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा और मोहतरम जनाब विनोद खनगवाल जी।
Comment by विनोद खनगवाल on November 17, 2016 at 5:46pm

आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, एक बहुत ही भावपूर्ण लघुकथा रची है ऐसे दृश्य कई बार हमारे सामने घटते हैं किसी मजबूर को देखकर अक्सर कोई न कोई मदद के लिए आगे आ ही जाता है। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 15, 2016 at 8:29pm

आज के हालत पर अच्छी लघु कथा लिखी है लोगों में संवेदना जगाती अच्छी प्रस्तुति बहुत बहुत बधाई आद० उस्मानी जी 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 15, 2016 at 5:32pm
स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरमा प्रतिभा पाण्डेय साहिबा व मोहतरम जनाब समर कबीर साहब। एक साथ कई समूहों में सहभागिता करते हुए व नेट समस्या के कारण कभी कभी जवाब प्रेषित करने में विलंब हो जाता है।
Comment by Samar kabeer on November 13, 2016 at 5:19pm
जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,आज के हालात पर अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
आज कल आप अपनी रचना पेश करने के बाद उसकी तरफ़ पलट कर देखते भी नहीं,क्या बात है जनाब ?
Comment by pratibha pande on November 13, 2016 at 8:47am

//सही कहा तुमने, न संभाल सकते हो, न ही इन लोगों को समझ सकते हो! लेकिन उनके ये नोट अगर इनकी दास्तां बयान करते हैं, तो हमारी पोल भी तो खोलते हैं!//"  पन्नी में रखे फटे नोटों का चलन हमारे यहाँ भी बहुत है  ,अक्सर लोग सब्जी बेचने वाली महिलाओं को अपने फटे नोट दे देते हैं ..  बहुत अच्छी लगी आपकी ये रचना ...हार्दिक बधाई आपको आदरणीय उस्मानी जी  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
18 hours ago
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service