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प्यार हमें तो बस करना है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र कुमार राणा

बह्र ए मीर
22 22 22 22

प्यार हमें तो बस करना है
साथ ही जीना औ मरना है।

दुनिया जो जी चाहे करले
बिल्कुल भी नहीं डरना है।

जिसने लूटा अब तक सबको
उसका घर तो नहीं भरना है।

कष्ट मिलें अब तक जनता को
उन सबको मिलकर हरना है।

राणा साथ जरूरी सबका
अब गर्दिश से गर तरना है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 4, 2016 at 11:34pm
आदरणीय सुरेश भाई जी सुख़न नवाजी के लिए तहे दिल शुक्रिया!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 4, 2016 at 11:33pm
आदरणीय गिरिराज सर सादर वन्दन,आपके मार्गदर्शनानुसार प्रयास करूँगा।स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार!
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on November 22, 2016 at 11:34am
मित्रवर एवं भ्राता सतविंदर जी सुन्दर सी भाव रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें।सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 22, 2016 at 11:06am

आदरणीय सतविन्द्र भाई , बहरे मीर  पर बहुत अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ । इस बहर का मूल लयात्मकता है , इस लिहाज़ से शायद कुछ शब्द इधर उधर  करना पड़े , देखियेगा भला .. ।

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