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ज़िन्दगी ..... (क्षणिका )


ज़िन्दगी ..... (क्षणिका )

हो गया
खामोश बशर
उलझनें
सुलझाने के
फेर में

एक
मकड़ी से
शर्मिंदा
हो गयी
ज़िन्दगी

सुशील सरना
मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 482

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Comment by Mahendra Kumar on January 2, 2017 at 10:20pm
बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सुशील सरना जी। आपको भी सपरिवार नववर्ष की ढेरों मंगलकामनाएँ। सादर।
Comment by Sushil Sarna on January 2, 2017 at 7:23pm

आदरणीयSamar kabeer    जी प्रस्तुति को उत्साहवर्धक शब्दों  से मान देने का हार्दिक आभार। नव वर्ष को आपको सपरिवार मंगलमय हो। 

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2017 at 7:21pm

आदरणीय  Mahendra Kumar  जी प्रस्तुति को स्नेहिल शब्दों से मान देने का हार्दिक आभार। नव वर्ष को आपको सपरिवार मंगलमय हो। 

Comment by Samar kabeer on January 2, 2017 at 5:34pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,आपकी क्षणिका पसन्द आई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mahendra Kumar on January 2, 2017 at 3:05pm
अच्छी रचना है आदरणीय सुशील सरना जी। हार्दिक बधाई। सादर।
Comment by Sushil Sarna on December 30, 2016 at 8:24pm

आदरणीय   narendrasinh chauhan   जी प्रस्तुति आपकी मन मुदित करती प्रशंसा की हार्दिक आभारी है। 

Comment by narendrasinh chauhan on December 30, 2016 at 7:11pm

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