For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल(गीत कौवे गा रहे हैं आजकल)

2122 2122 212

*****************
गीत कौवे गा रहे हैं आजकल
कंठ कोयल के भरे हैं आजकल।1

दुश्मनी सारी भुलाकर मसखरे
फिर गले से मिल रहे हैं आजकल।2

गालियाँ देते परस्पर जो रहे
प्रीत के सागर बने हैं आजकल।3

आज दुबके हैं सभी गिरगिट यहाँ
रंग बदलू आ गये हैं आजकल।4

कुर्सियों का ताव इतना बढ़ गया
धुर विरोधी भा गये हैं आजकल।5

लोग ठगते रह गये खुद को यहाँ
और ठगने जा रहे हैं आजकल।6

सींचते हैं जड़ नहीं,बस फुनगियाँ,
कारनामे कब खले हैं आजकल?7

रातभर रोता रहा दीया यहाँ
भोर के चर्चे चले हैं आजकल।8

फिर कुहासा रोशनी को घेरता
बेखबर-से दिन ढ़ले हैं आजकल।9

मौलिक व अप्रकाशित@मनन

Views: 734

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on February 9, 2017 at 9:31pm
आपका आभार आदरणीय जयनीत जी।
Comment by जयनित कुमार मेहता on February 9, 2017 at 9:26pm
आदरणीय मनन जी, आपकी रचना अच्छी है, तथा यत्र-तत्र की अपेक्षा है, जिसपर विद्वजन कह चुके हैं। सादर।
Comment by Manan Kumar singh on February 8, 2017 at 11:30pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय समर  साहब, यथा योग्य गौर करता हूँ। आपके इस्लाह की आकांक्षा सर्वदा ही रहती है। 

Comment by Samar kabeer on February 8, 2017 at 10:34pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

दूसरे शैर के सानी मिसरे में जनाब मिथिलेश जी का सुझाव अच्छा है ।

गालियाँ पहले कभी देते रहे
प्रीत के सागर बने हैं आजकल।3

इस शैर के बारे में दिनेश जी सही फ़रमा रहे हैं ,आप चाहें तो ऊला मिसरा इस तरह कर सकते हैं :-

"गालियाँ देते रहे जो उम्र भर"

"माँद में दुबके हुए गिरगिट यहाँ
रंग बदलू आ गये हैं आजकल।"

इस शैर के बारे में आपको बताना चाहूँगा कि गिरगिट 'माँद' में नहीं रहते ,शैर 'माँद' में रहते हैं ।

"लोग ठगते रह गये खुद से यहाँ
और ठगने जा रहे हैं आजकल"

इस शैर में मफ़हूम साफ़ नहीं है ।देखियेगा ।

बाक़ी शुभ-शुभ ।
Comment by Manan Kumar singh on February 8, 2017 at 10:14pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय दिनेश  जी। देखता हूँ, 

Comment by Manan Kumar singh on February 8, 2017 at 10:12pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय बृजेश जी। 

Comment by Manan Kumar singh on February 8, 2017 at 10:12pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय आरिफ भाई । 

Comment by Manan Kumar singh on February 8, 2017 at 10:11pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 8, 2017 at 9:52pm
गीत कौवे गा रहे हैं आजकल
कंठ कोयल के भरे हैं आजकल..बेहतरीन सादर..
Comment by दिनेश कुमार on February 8, 2017 at 7:38pm
उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई आदरणीय मनन साहब। वाह वाह।
तीसरे शेर में कर्ता गायब है। शायद।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
18 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service