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212 212 212
इस तरह रूठ मत जाइए ।
आइये बस चले आइये ।।

आज तो जश्न की रात है ।
घुंघरुओं की सदा लाइए ।।

टूट जाए न दिल ही मेरा ।
जुल्म इतना नहीं ढाइये ।।

बेगुनाही पे चर्चा बहुत ।
कुछ सबूतों से भरमाइये ।।

जो तरन्नुम में था मैं सुना ।
गीत फिर से वही गाइये ।।

हम गिरफ्तार पहले से हैं ।
मत रपट कोई लिखवाइये।।

है ग़ज़ल में मेरे तू ही तू ।
एक मिसरा तो पढ़वाइये ।।

हूँ तेरे हुस्न का आइना ।
देखकर कुछ संवर जाइए ।।

धूप का है इरादा बुरा ।
बन के काली घटा छाइए ।।

कुछ तो मजबूरियां थीं तेरी ।
बेवजह मत कसम खाइये ।।

यह मुनासिब कहाँ है सनम ।
जख़्म से दिल को बहलाइये ।।

-- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Naveen Mani Tripathi on February 8, 2017 at 9:08pm
आ0 डॉ आशुतोष मिश्र जी सादर आभार
Comment by Naveen Mani Tripathi on February 8, 2017 at 9:07pm
आदरणीय मो0 आरिफ साहब तहेदिल से शुक्रिया ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on February 8, 2017 at 9:05pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर सर सादर आभार के साथ नमन
Comment by Naveen Mani Tripathi on February 8, 2017 at 9:05pm
आदरणीय कबीर सर सादर नमन । अत्यंत कीमती सलाह के तहेदिल से आभारी हूँ ।
Comment by Samar kabeer on February 8, 2017 at 9:01pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'है ग़ज़ल में मेरे तू ही तू
एक मिसरा तो पढ़वाइये'
इस शैर में 'ग़ज़ल'शब्द स्त्रीलिंग है, इसलिये मेरे नहीं कह सकते,दूसरी बात,'पढ़वाइये'सम्बोधन आदर का है, इसके साथ 'तू'शब्द मुनासिब नहीं,इसलिये इस शैर को यूँ कह सकते हैं :-
'हो ग़ज़ल में मेरी तुम ही तुम
एक मिसरा तो पढ़वाइये'

'हूँ तेरे हुस्न का आइना
देख कर कुछ सँवर जाइये'
इस शैर में भी 'तेरे'शब्द रदीफ़ का मज़ाक़ उड़ा रहा है,इसे यूँ कह सकते हैं :-
"आइना हूँ तुम्हारा सनम
देख कर कुछ सँवर जाइये"

'कुछ तो मजबूरियाँ थीं तेरी
बेवजह मत क़सम खाइये'
इस शैर में भी वही ख़राबी है 'तेरी'शब्द मज़ा ख़राब कर रहा है,इस शैर को यूँ कह सकते हैं :-
"माना, थीं कुछ तो मजबूरियाँ
बेवजह मत क़सम खाइये"

बाक़ी शुभ शुभ ।
Comment by Mohammed Arif on February 8, 2017 at 5:45pm
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, उम्दा ग़ज़ल की प्रस्तुति पर मुबारकबाद कुबूल करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 8, 2017 at 4:09pm

आदरणीय नवीन जी, इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 8, 2017 at 2:12pm

इस सुंदर प्रस्तुति पर बधाई सादर 

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