For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मनहरण घनाक्षरी...समीक्षार्थ..अबके चुनाव में...//अलका ललित

समीक्षार्थ
मनहरण घनाक्षरी ....(एक प्रयास)
***
भ्रष्टाचारियों से बड़ी
चोट खाई पीढ़ियों ने
चोट ये मिटानी होगी
अबकी चुनाव में  
.
दांव न लगाने देंगे
झूठे वादों का जी अब
हार भी चखानी होगी
अबकी  चुनाव में
.
मतदाता याद आए
पांच साल बाद जिसे
मात उसे खानी होगी
अबकी चुनाव में
.
मिल कर सोचो सब
चाहते समाज कैसा
ताकत दिखानी होगी
अबकी  चुनाव में
.

***
मौलिक एवं अप्रकाशित

((चार पदों के इस वर्णिक छन्द में प्रत्येक पद में कुल वर्णों की संख्या ३१ होती है.प्रत्येक चरण में वर्णों की संख्या क्रमशः ८, ८, ८, ७ की यति के अनुसार . तथा, पदान्त लघु-गुरु से हो. ))

Views: 598

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on April 12, 2017 at 8:43pm

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी ,नमस्कार प्रयास  को समय देने  व् मार्गदर्शन के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपके निर्देश अनुसार सुधार किया है।   सादर 

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on April 12, 2017 at 8:40pm

आदरणीय  Samar kabeer जी ,नमस्कार , आपको प्रयास पसंद आया ,लेखन कर्म सफल हुआ ,रचना को समय देने के लिए हार्दिक धन्यवाद। सादर 

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on April 12, 2017 at 8:38pm

आदरणीय Mohammed Arif ji ,नमस्कार , उत्साहवर्धन  के लिए हार्दिक धन्यवाद। सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 11, 2017 at 11:10am

भ्रष्टाचारियों से बड़ी
चोट खाई पीढ़ियों ने
चोट ये मिटानी होगी
अबकी चुनाव में  
.
दांव न लगाने देंगे
झूठे वादों का जी अब
हार भी चखानी होगी
अबकी  चुनाव में
.
मतदाता याद आए
पांच साल बाद जिसे
मात उसे खानी होगी
अबकी चुनाव में
.
मिल कर सोचो सब
चाहते समाज कैसा
ताकत दिखानी होगी
अबकी  चुनाव में

 

 

 

Comment by Samar kabeer on April 10, 2017 at 6:09pm
मोहतरमा यलक ललित जी आदाब,छन्दों पर अच्छा अभ्यास हो रहा है,देख कर ख़ुशी हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on April 10, 2017 at 12:45pm
आदरणीया अलका ललित जी आदाब, बेहतरीन छांदसिक रचना । रचना सामयिक होती तो ज़्यादा बेहतर होता । हार्दिक बधाई । बाक़ी गुणीजन अपनी अमूल्य राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
14 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service