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उसके आँचल उड़ा नही करते

2122 1212 22

बेसबब वह वफ़ा नहीं करते । खत मुझे यूँ लिखा नहीं करते ।।

है मुहब्बत से वास्ता कोई । उस के आँचल उड़ा नहीँ करते ।।

लूट जाते हैं जो मेरे घर को। गैर वह भी हुआ नहीं करते ।।

बात कुछ तो जरूर है वर्ना । तुम हक़ीक़त कहा नही करते ।।

न्याय बिकता है इस ज़माने में । बिन लिए फैसला नही करते ।।

वह गवाही भी बिक गई कब की ।
अब भरोसा किया नही करते ।।

जश्न लिखता हयात को बन्दा ।
जिंदगी से डरा नहीँ करते ।।

है भरोसा जिन्हें यहां खुद पर ।
वह खुदा से दुआ नहीं करते ।।

थोड़ी तहज़ीब भी जरूरी है । महफिलों से उठा नहीं करते ।।

और चेहरा खराब होता है ।
दाग ऐसे धुला नहीं करते ।।

पूछिये रात माजरा क्या था । यूँ ही काजल बहा नहीं करते ।।

टूट जाये कहीं न् दिल कोई।
इस तरह ख़त लिखा नहीं करते ।।

कुछ तो अय्याशियां रहीं होंगी । नाम यूँ ही मिटा नहीं करते ।।

है खुमारी तमाम चेहरे पर । कौन कहता नशा नहीं करते ।।

जो हिफ़ाज़त में हुस्न रखते हैं । रहजनों से लुटा नहीं करते ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 19, 2017 at 8:54pm
आदरणीय नवीन मणि जी खूबसूरत गजल के लिए बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें!
Comment by Naveen Mani Tripathi on April 18, 2017 at 6:30pm
सादर आभार सर
Comment by Ravi Shukla on April 18, 2017 at 3:59pm

अादरणीय नवीन मणि जी बड़ी और बड़ी बढि़या ग़ज़ल कही है आपने बधाई कुछ शेर बहुत अच्‍छे लगे कुछ में मशहूर शेर का रंग नजर आ रहा है इससे हमें बचना च‍ाहिये । जैसे कुछ तो मजबूरियॉं रही होंगी  ।  कुछ तो अय्याशियॉं रही होगी । इस बहर में काफियों के साथ बहुत गुजांइश है । सादर

Comment by Naveen Mani Tripathi on April 16, 2017 at 2:41pm
आ0 सुरेंद्र नाथ सिंह कुश क्षत्रप साहब आभार ।
Comment by नाथ सोनांचली on April 16, 2017 at 11:06am
आद0 भाई नवीन मणि त्रिपाठी जी सादर अभिवादन, उम्दा ग़ज़ल लगी मुझे, बधाई इस सृजन पर

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