For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपने घर लौटा तो कोई था न स्वागत के लिए

घर के दरवाजों पे ताले थे शरारत के लिए

 

जब कहा मन ने तो ‘मोबाइल’ उठाकर बात की,

अब प्रतीक्षा कौन करता है किसी ख़त के लिए?

 

मैं बरी होकर भी दोषी हूँ स्वयं की दृष्टि में,

कुछ अलग कानून है मन की अदालत के लिए

 

बाहुबल से भी अधिक धन-बल जरुरी हो गया

हाँ, तभी जाकर जुटा जन-बल सियासत के लिए

 

अब न वैसे दोस्त हैं, परिजन भी अब वैसे नहीं,

आप किसके पास जायेंगे शिकायत के लिए?

 

हानि अथवा लाभ का चश्मा चढ़ा लेने के बाद-

वो बहुत चिंता नहीं करती है ‘अस्मत’ के लिए

 

झोंपड़ी की छत मिली सौ कोशिशों के बाद ही

एक भी कोशिश न की आकाश की छत के लिए

 

ज़हीर कुरैशी

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 1925

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 3:44pm
इस मंच पर आपत्ति का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है,ये मंच सीखने सिखाने के उद्देश्य से बनाया गया है इसलिये इतनी चर्चा होती है,लेकिन कुछ दिनों से ये देखने में आ रहा है कि यहाँ सीखने वालों की तादाद कम होती जा रही है और सिखाने वालों की तादाद ज़ियादा है :-
'सब अँधेरों से कोई वादा किये बैठे हैं
कौन ऐसे में मुझे शमअ जलाने देगा'
'त'के क़ाफिये के साथ अगर 'ख़त'क़ाफ़िया लेना है तो ये ऐलान भी ज़रूरी होगा कि आपने सौती क़ाफ़िया ले लिया है,इसके बाद इसे गवारा किया जा सकता है,अन्यथा ऐतिराज़ का पहलू तो है ही,और रही उर्दू फ़ारसी की बात,तो यहाँ ये भी बता दूँ कि 'ख़त'शब्द उर्दू या फ़ारसी का नहीं,अरबी भाषा का है ।
और जिन्हें इसको क़बूल करना है वो मिसाल में किसी मुस्तनद शाइर का कोई ऐसा शैर पेश कर दें जिसमें 'त'के क़ाफ़ियों के साथ 'ख़त'का इस्तेमाल किया गया हो,हम इसे तस्लीम कर लेंगे,सिर्फ़ बातें बनाने से कोई फैसला तो नहीं होता,इसके बावजूद अगर कोई ऐसे क़ाफिये अपनी ग़ज़ल में रखना ही चाहे तो उसे चाहिये कि अपनी ग़ज़ल के साथ 'हिन्दी ग़ज़ल'लिख दे,फिर कोई कुछ नहीं कहेगा,अगर ऐसा नहीं किया जाता तो ऐसे सवाल तो ज़रूर उठेंगे।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 5, 2017 at 8:05pm

आदरणीय ज़हीर भाई , ओ बी ओ पर स्वागत है आपका । आपके मार्गदर्शन के मंच की गज़लों मे और निखार आयेगा ।    

आदरनीय , बेहतरीन गज़ल से मंच को नवाजा है आपने , आपको हृदय से बधाइयाँ आदरणीय , मेरी व्यक्तिगत  समझ से ' खत ' काफिया सही है .... फिर भी आपके मार्गदर्शन का इंतिज़ार है ।

Comment by Ravi Shukla on May 5, 2017 at 5:41pm
आदरणीय ज़हीर साहब ओ बी ओ पर आपके आगमन से हमें बहुत प्रसन्नता हुई । निसंदेह आपके मार्गदर्शन में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा । आपका हार्दिक स्वागत है । इस मुरस्सा ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई । सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 5, 2017 at 5:07pm

मोहतरम तस्दीक साहिब, मोहतरम ज़हीर साहब वरिष्ठ ग़ज़लकारों में से एक है जिनकी कई किताबें प्रकाशित हुई हैं। आपकी ख्याति हिंदुस्तानी ज़बान के ग़ज़लकार के रूप में है, इनकी अन्य रचनाएँ आप पढेंगे तो बात साफ हो जाएगी कि इन्होंने यहाँ ख़त काफिया क्यों लिया है। 

माजरत के साथ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 5, 2017 at 5:03pm

मोहतरम जनाब ज़हीर कुरैशी साहब आदाब, ओबीओ के मंच पर आपको देखकर इंतिहाई खुशी हो रही है, आपके जैसे वरिष्ठ ग़ज़लकार के आने से यह मंच और समृद्ध हुआ है, निस्संदेह आपके अनुभवों से हम नए गज़लकारों को सीखने के लिए बहुत कुछ मिलेगा। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दाद ओ मुबारक़बाद कुबूल फरमाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 5, 2017 at 5:03pm

मोहतरम जनाब ज़हीर कुरैशी साहब आदाब, ओबीओ के मंच पर आपको देखकर इंतिहाई खुशी हो रही है, आपके जैसे वरिष्ठ ग़ज़लकार के आने से यह मंच और समृद्ध हुआ है, निस्संदेह आपके अनुभवों से हम नए गज़लकारों को सीखने के लिए बहुत कुछ मिलेगा। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दाद ओ मुबारक़बाद कुबूल फरमाएँ

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 5, 2017 at 4:52pm

हार्दिक अभिनन्दन जहीर जी इस सीखने सिखाने के शानदार मंच पर आपका .उम्दा ग़ज़ल हुयी है इसके लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 5, 2017 at 4:52pm

हार्दिक अभिनन्दन जहीर जी इस सीखने सिखाने के शानदार मंच पर आपका .उम्दा ग़ज़ल हुयी है इसके लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 4, 2017 at 11:50pm
मुहतरम जनाब ज़हीर क़ुरैशी साहब आदाब, ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है। बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । कुछ शे'र तो बहुत ही सामयिक हैं । आदरणीय ज़हीर क़ुरेशी जी आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है। बहुत ही बेहतरीन सामयिक ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 4, 2017 at 9:59pm
झोंपड़ी की छत मिली सौ कोशिशों के बाद ही
एक भी कोशिश न की आकाश की छत के लिए..बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई..सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"प्रस्तुत रचना को रूपमाला छंद पर लिखा गया है। इस छंद के प्रयोग और विधान का जितना मुझे पता लग सका उसे…"
22 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
22 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
22 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
22 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday
Admin posted discussions
Tuesday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service