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दुःख और सुख-- लघुकथा

"लकवा मार गया है, अब बिस्तर पर ही रहना पड़ेगा इसको| शायद मालिश और दवा से कुछ फायदा हो और चलने फिरने लायक हो जाए कुछ दिन में", डॉक्टर ने एक कागज पर कुछ दवा लिखा और बाहर निकलने लगा|
"हस्पताल में भर्ती कराने से कुछ फायदा होगा क्या डॉक्टर साहब", बिटिया ने पूछा|
"कह नहीं सकता, हो भी सकता है", कहकर डॉक्टर निकल गया|
"माँ, बापू को हस्पताल ले चलते हैं, शायद ठीक हो जाए", बिटिया ने माँ की तरफ देखते हुए कहा|
उसने एक बार खाट पर पड़े लल्लू को देखा और फिर अपनी कमर में बंधे गांठ से कुछ रुपये निकाले|
"जा जरा पंसारी के यहाँ से टमाटर और प्याज तो ले आ", उसने बिटिया को रुपये पकड़ाते हुए कहा| बिटिया अचरज से उसका मुंह देखने लगी "अरे तू पगला गयी है, बापू खटिया पर पड़ा है और तुमको सब्जी की पड़ी है| बापू को कल हस्पताल ले चलते हैं किसी तरह"|
"रहने दे उसको ऐसे ही, कम से कम अब मुझे लात घूंसे तो नहीं लगाएगा| खाने के लिए तो वैसे भी मैं ही कमाती थी, यह तो सिर्फ दारू और मारपीट के लिए कमाता था| जा जल्दी से सामान लेकर आ, आज ठीक से खाना खाएंगे", कहकर उसने एक बार अपने पल्लू से आंसू पोंछा और जाकर लल्लू के सिरहाने बैठ गयी| बिटिया ने थोड़ी देर उसको और बापू को देखा और धीरे से किवाड़ भिड़काकर बाहर निकल गयी|
मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on July 2, 2017 at 9:14am

बहुत बहुत आभार आ बृजेश कुमार बज्र जी 

Comment by विनय कुमार on July 2, 2017 at 9:13am

बहुत बहुत आभार आ नीता कसार जी 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 1, 2017 at 12:10pm
संवेदनाओं से परिपूर्ण लघु कथा के लिए बधाई
Comment by Nita Kasar on July 1, 2017 at 11:48am
हर महिला के लिये दुख और सुख के अपने अपने दायरे है,पत्नि का दुख अपनी जगह वाजिब है,बेटी का अपनी जगह ।शराबी हो पति तो पत्नि का सुखी होना मुश्किल है।संवेदनशील कथा के लिये बधाई आद० विनय सिंह जी ।
Comment by विनय कुमार on June 28, 2017 at 7:04pm

बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब  

Comment by विनय कुमार on June 28, 2017 at 7:03pm

बहुत बहुत आभार आ मोहम्मद आरिफ साहब  

Comment by विनय कुमार on June 28, 2017 at 7:03pm

बहुत बहुत आभार आ तेजवीर सिंह जी 

Comment by Samar kabeer on June 28, 2017 at 3:02pm
जनाब विनय कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on June 28, 2017 at 12:07pm
आदरणीय विनय कुमार जी आदाब, सशक्त और कटाक्षपूर्ण कथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by TEJ VEER SINGH on June 28, 2017 at 11:19am

हार्दिक बधाई ।बेहतरीन प्रस्तुति।

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