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ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फऊलन)

मेरे प्यार का शम्स ढलने से पहले |
कोई आ गया दम निकलने से पहले |

बहुत होगी रुसवाई यह सोच लेना
रहे इश्क़ में साथ चलने से पहले |

तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली
कहाँ तू ने सोचा मसलने से पहले|

कहे सच हर इक आइना सोच लेना
बुढ़ापे में इसको बदलने से पहले |

ख़यालों में आ जाओ कटती नहीं शब
मिले चैन दिल को मचलने से पहले |

अज़ल से है उल्फ़त का दुश्मन ज़माना
लगाए यह ठोकर संभलने से पहले |

है शतरंज का खेल तस्दीक़ उल्फ़त
न दिल की तू सुन चाल चलने से पहले |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by vijay nikore on July 24, 2017 at 11:36am

बहुत ही उम्दा गज़ल लिखी है, आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी । हार्दिक बधाई।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 20, 2017 at 8:09pm
मुहतरम जनाब गिरिराज साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2017 at 11:27am

आदरणीय तस्दीक भाई , बेहतरीन गज़ल कही है , दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल करें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 17, 2017 at 8:24pm
मुहतरम जनाब रवि साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी
Comment by Ravi Shukla on July 17, 2017 at 6:08pm
आदरणीय तस्दीक साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल आपने कही है इसके लिए शेर दर्शन दिली मुबारकबाद पेश करते हैं आखरी शेर खास तौर से पसंद आया उसके लिए अलग से मुबारकबाद सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 17, 2017 at 6:06pm
जनाब मोहित साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 17, 2017 at 6:05pm
जनाब गुरप्रीत साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 17, 2017 at 1:10pm
आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने...सभी अशआर उम्दा हुए हैं
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 10:23pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला
अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 16, 2017 at 9:57pm
बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय ...सादर

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