For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चलो फिर यादों के सफ़र पर......संतोष

चलो फिर यादों के सफ़र पर हो आते हैं ,
तन्हाई का ये दौर कुछ देर को भूल आते है

बिखरे हमारे ख़्वाबों को ग़र सवाँरना हो तो,
चलो आज फिर उनसे मुलाक़ात कर आते हैं

ख़्वाबों में ही सही मगर थे हमसफ़र कभी,
यही ऐहसास को फिर पैकर किये आते है

ये कैसा मरज है कि दिलों से जाता ही नहीं,
दिल अफ़्सुर्दा है क्यूँ तुम्हारा ये भी जान आते है

सोचा नहीं था कि फिर सामना होगा तुमसे,
बिखरे ख़्वाबों का एक नया आईना बना आते हैं

उम्मीद आज भी फ़क़त ईतनी है तुमसे,
बैठो ज़रा क़रीब से फ़ासला सदियों का मिटा आते है

यूँ तो तेरे हिज़्र का सदमा मुझे आज़ार किये है,
ज़िंदगी भी गिराबार है,यही बताने चले आते हैं

गुज़रे वक़्त पर गुफ़्तगू में वक़्त तो लगेगा'संतोष'
हिसाब जो मजबूरियों का है फिर वही कर आते है

~संतोष खिरवड़कर
[मौलिक एवं अप्रकाशित]

Views: 665

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by santosh khirwadkar on August 8, 2017 at 11:22am

आदरणीय रवि जी नमस्कार , आप बिल्कुल सही कह रहे हैं ,किन्तु हम जैसे नविन प्रशिक्षुओं के लिए आप के मुताबिक निचे उल्लेखित जानकारी वास्तव में बिलकुल ही समझ नहीं आती , इस मंच से एवं इस सन्देश के माध्यम से आग्रह पूर्वक निवेदन चाहूंगा कि इन तकनिकी /बारीकियों के जानकारी हेतु कार्यशालाओं का आयोजन अति आवश्यक भी है और अपेक्षित भी !!!

Comment by Ravi Shukla on August 8, 2017 at 9:52am

आदरणीय संतोष जी आपकी रचना का स्‍वागत है अगर इसेगजल के रूप में आपने प्रस्‍तुत किया है तो अरूज के मुताबिक ये गजल नहीं है ।इसमें काफिया ही नहीं है और आप ने इसका अरकान भी रचना से पहले नहीं लिखा जिससे इसकी बहर पहचानने में सहूलियत हो ।

ये मंच का अनुशासन भी है । अगर गजल पर अभ्‍यास करना चाहें तो मंच पर गजल की कक्षा और गजल की बातें दो स्‍थान है जहां विस्‍त़त जानकारी उपलब्‍ध है सादर ।

Comment by santosh khirwadkar on August 7, 2017 at 8:05pm

शुक्रिया आ. आरिफ़ साहब...... 

Comment by santosh khirwadkar on August 7, 2017 at 8:04pm

शुक्रिया सुरेंद्र जी .......

Comment by santosh khirwadkar on August 7, 2017 at 8:02pm

प्रणाम सहित शुक्रिया आ. समर साहब , आप के दिए इस मार्गदशर्न अनुसार अवश्य ही दुरुस्त कर लूँगा .........
ह्रदय से आभार !!

Comment by vijay nikore on August 7, 2017 at 1:09pm

रचना अच्छी लगी। बधाई।

Comment by नाथ सोनांचली on August 7, 2017 at 8:06am
आद0 सन्तोष जी सादर अभिवादन, अच्छी कविता लिखी है। आपने, समर साहब के विचारों से सहमत हूँ, आपको बधाई
Comment by Mohammed Arif on August 6, 2017 at 11:17pm
आदरणीय संतोष जी आदाब, बेहतरीन प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम जनाब समर कबीर साहब की बातों पर ग़ौर करें ।
Comment by Samar kabeer on August 6, 2017 at 6:46pm
जनाब संतोष जी आदाब,बहुत अच्छी लगी आपकी ग़ज़ल नुमा कविता,सुंदर भाव सजाए हैं आपने,इस प्रस्तुति पर,बधाई स्वीकार करें ।
'यूँ तो तेरे हिज्र का सदमा मुझे आज़ार किये है'
इस पंक्ति को यूँ कर लें:-

'यूँ तो तुम्हारे हिज्र का सदमा मुझे आज़ार दिये है'
और इसके नीचे की पंक्ति को यूँ कर लें :-
'ज़िन्दगी भी गिरांबार है यही बताने चले आते हैं'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
yesterday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service