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" स्वतंत्रता जय-राग "/ अर्पणा शर्मा

स्वतंत्रता जय-राग सुनाओ,
जय-हिन्द की जयकार गुँजाओ,
सब जन हिलमिल करके आओ,
प्रखर गीत कोई ऐसा गाओ...!

क्षेत्र ,धर्म, जाति मिल सब,
छिन्न करें अस्तित्व जब तक,
खतरे में देश-रक्षा हर क्षण,
दुश्मन की हों मौंजें तब तक,

भारत माँ को अब न लजाओ,
एकसूत्र निरापद हो जाओ,
सब मिल देश सबल बनाओ,
प्रखर गीत कोई ऐसा गाओ...!

आतंक कहर ढाता रहा,
शूरवीर प्राण लुटाता रहा,
रक्त-रंजित इस धरा पर,
जन-जीवन छटपटाता रहा,

और न सियासी खेल दिखाओ,
गद्दारों को सबक सिखाओ,
सैन्य का मनोबल बढ़ाओ,
 प्रखर गीत कोई ऐसा गाओ...

कहाता धरती पर जो स्वर्ग,
अनगिन वीर जहाँ उत्सर्ग,
आतंकियों से अमन-हराम,
 मकसद जिनका सदा कोहराम,

अब और न चमन तबाह कराओ,
 देशभक्ति की अलख जगाओ,
शत्रु का विध्वंस कराओ,
प्रखर गीत कोई ऐसा गाओ...

 ग्राम्य जीवन है भारत देश,
निश्चल-पावन इसका वेष,
कृषक, कारीगर उन्नति उन्मेष,
अथक परिश्रम का दें संदेश,

 सर्व-शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रगति,
सर्व जन हित का मार्ग सुझाओ,
 जन-गण-मन को सुदृढ़ बनाओ,
प्रखर गीत कोई ऐसा गाओ...!

जल, खनिज, वन-संपदा,
प्रकृति ने दी भरपूर  सदा,
सूखा-बाढ़, प्रकोप बहुधा
दहलाएं प्राकृतिक आपदा,

मुक्त-हस्त ना इसे लुटाओ,
मितव्ययता से इसे बचाओ,
 संसाधन संपन्न कहलाओ,
 नव-पीढ़ी थाती रखाओ,

स्वतंत्रता जय-राग सुनाओ,
जय-हिन्द की जयकार गुँजाओ,
सब जन हिलमिल करके आओ,
प्रखर गीत कोई ऐसा गाओ...!,,,

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Arpana Sharma on September 9, 2017 at 12:24pm
आपकी सराहना का बहुत आभार आदरणीय जनाब समर कबीर जी एवं मोहम्मद आरीफ जी
Comment by Mohammed Arif on August 15, 2017 at 7:51pm
आदरणीया अर्पणा शर्मा जी आदाब, स्वतंत्रता दिवस की गरिमा-गौरव को रेखांकित करता बेहतरीन गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Samar kabeer on August 15, 2017 at 6:17pm
मोहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब,यौम-ए-आज़ादी पर बढ़िया रचना हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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