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तरही ग़ज़ल (है अजब चीज मुहब्बत मुझे मालूम न था)

ख़ुद से हो जाएगी नफरत मुझे मालूम न था
है अजब चीज़ मुहब्बत, मुझे मालूम न था ||

गम से हो जायेगी उल्फ़त मुझे मालूम न था
ऐसी होगी मेरी क़िस्मत मुझे मालूम न था ||

दूध में कोई नहाये कोई भूखा ही रहे
ऐसे होती है सियासत मुझे मालूम न था ||

ख़्वाब में रोज़ ही मिलते थे मग़र, यार मेरे
ख़्वाब होगा ये हक़ीक़त मुझे मालूम न था ||

वहम इक पाल लिया था मेरे दिल ने यूँ ही
थी उसे हँसने की आदत मुझे मालूम न था ||

यार कहता था ग़ज़ल वक़्त बिताने को कभी
आगे लग जायेगी ये लत मुझे मालूम न था ||

हुस्न की बिजली गिरी और हुए लोग तबाह
*यूँ भी आती है कयामत मुझे मालूम न था*||

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 7, 2017 at 4:20am
आद0 सलीम रज़ा साहब सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी शिरकत और बधाई का शुक्रिया। सादर
Comment by SALIM RAZA REWA on September 6, 2017 at 8:57pm
आदरणीय सुरेन्द्र जी इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई..
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 6, 2017 at 6:38pm
आद0 आशुतोष जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति औऱ उत्साहवर्धन के लिए सादर अभिवादन
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 6, 2017 at 5:35pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 6, 2017 at 3:06pm
जनाब तस्दीक अहमद खान जी ग़ज़ल में शिरकत के लिए बहुत बहुत आभार आपका। सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 6, 2017 at 2:39pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 6, 2017 at 2:03pm
आद0 गुरप्रीत सिंह जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन के लिए हृदय तल से आभार।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 6, 2017 at 2:02pm
आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन, गज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार।
Comment by Gurpreet Singh on September 6, 2017 at 9:43am

आदरणीय सुरेंद्र जी,, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है,, बधाई स्वीकार करें  

Comment by vijay nikore on September 6, 2017 at 7:03am

अच्छी गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

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