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ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )
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(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन )


मुन्तखिब करता है दिल जिसको भी दिलबर यारो |
हाए वो शख़्स निकलता है सितम गर यारो |

उनके चहरे से नज़र हटती नहीं है मेरी
किस तरह देखूं ज़माने के मैं मंज़र यारो |

कूचए यार से जाएँ तो भला जाएँ कहाँ
राहे उलफत में लुटा बैठे हैं हम घर यारो |

आस्तीनों में जो रखते हैं छुपा कर खंजर
उन अज़ीज़ों से हमेशा रहो बच कर यारो |

रु बरु उनके मैं रोता ही रहा सोच के यह
आँसुओं से तो पिघल जाते हैं पत्थर यारो |

डूब कर इनमें कोई उभरे तो उभरे कैसे
चश्मे दिलबर में है पोशीदा समुंदर यारो |

जिसको तस्दीक़ समझता रहा रहबर अपना
वो चुभोता ही रहा पीठ में नश्तर यारो |

मुन्तखिब --चुनना , पोशीदा-छुपा हुआ

( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by पंकजोम " प्रेम " on September 15, 2017 at 2:40pm
वाह उम्दा ग़ज़ल की दिली मुबारकबाद क़बूल करें
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 7, 2017 at 11:16pm

जनाब ब्रजेश कुमार  साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 7, 2017 at 11:16pm

जनाब राज़ नवाद्वी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 7, 2017 at 12:21pm
वाह वाह बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय..
Comment by राज़ नवादवी on September 7, 2017 at 12:18pm

जनाब Tasdiq Ahmed Khan साहब, बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है, मुबारकबाद क़ुबूल करें. खासकर मतला सुन्दर बन पडा है. सादर 

मुन्तखिब करता है दिल जिसको भी दिलबर यारो |
हाए वो शख़्स निकलता है सितम गर यारो |

वाह 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 7, 2017 at 8:24am
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 7, 2017 at 8:23am
जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 7, 2017 at 8:22am
जनाब आशुतोष साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Mohammed Arif on September 7, 2017 at 7:38am
आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब, लाजवाब ग़ज़ल । बेहतरीन अश'आर ।शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
Comment by SALIM RAZA REWA on September 6, 2017 at 8:52pm
आली जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,
बहुत अच्छी ही ग़ज़ल हुई है, हर इक शेर के लिए मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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