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ग़ज़ल - मैं उसकी ताब से खो कर हवास बैठा था ( गिरिराज भंडारी )

1212   1122   1212   22  
नहीं ये ठीक, मैं तन्हा उदास बैठा था

मैं उसकी ताब से खो कर हवास बैठा था

                                                                                    

नज़र उठा के तेरी सिम्त कैसे करता मैं

नज़र से चल के कोई दिल के पास बैठा था

 

कहीं नदी की रवानी थमी थी पत्थर से

कहीं लिये कोई सदियों की प्यास बैठा था

 

है मोजिज़ा कि ख़ुदा का करम बहा मुझ पर   

वो तर बतर हुआ जो मेरे पास बैठा था

 

जलीं वहीं पे दुकानें बहुत सी कपड़ों की

जहाँ सड़क पे कोई बे लिबास बैठा था

 

उधर से गोलियाँ चलतीं, इधर से पत्थर थे

खबर ये देख के, मैं बद हवास बैठा था

 

डरी हुयी थी हक़ीक़त, वो बोलती कैसे

टिकाये अस्लहे सर पर, क़यास बैठा था     

************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 20, 2017 at 6:32pm

आदरणीय राम बली भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय तल से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 20, 2017 at 6:32pm

आदरणीय गुमनाम भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।

Comment by रामबली गुप्ता on September 19, 2017 at 10:12pm
वाह वाह आद0 गिरिराज भाई जी। बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 19, 2017 at 4:40pm
आ.भाई गिरिराज जी, अभीवादन । सुंदर गजल हुई है , हार्दिक बधाई ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 18, 2017 at 6:15pm

आदरणीया अलका जी , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on September 18, 2017 at 3:51pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर अभिवादन ,बेहद खूबसूरत गजल के लिए बहुत बधाई । सादर  ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 18, 2017 at 7:57am

आदरणीय समर भाई , गज़ल पर उपस्थित हो कर उत्साह वर्धन करने के लिये आभार आपका ।

Comment by Samar kabeer on September 17, 2017 at 9:37pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 17, 2017 at 1:37pm

आदरनीय वासुदेव भाई , ग़ज़ल की सराहना के लिये हृदय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 17, 2017 at 1:36pm

आदरणीय सुरेन्द्र भाई , उत्साह वर्धन के लिये हृदय से आभार आपका ।

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