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ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

मापनी 1222 1222 1222 1222

इधर  जाता तो अच्छा था, उधर जाता तो अच्छा था.

रहा भ्रम में, कहीं पर यदि, ठहर जाता तो अच्छा था.

 

उभर आता तो अच्छा था, हृदय का घाव चेहरे पर,

हमारा  दर्द  भी हद से, गुजर जाता तो अच्छा था.

 

उधर घुसकर गए भी थे, सिखाया था सबक भी कुछ,

वहाँ  पर  यदि तिरंगा भी फहर जाता तो अच्छा था

 

किनारे पर रहा अठखेलियाँ करता, न पाया कुछ,  

अगर गहरे समंदर में उतर जाता तो अच्छा था

 

उन्होंने ख्वाब दिखलाये, सभी को आसमानों के.

जमीं पर एक घर भी अब, सँवर जाता तो अच्छा था

 

हमारे गाँव की मिटटी, रही बुनियाद शहरों की,

कँगूरों तक भी थोड़ा सा, असर जाता तो अच्छा था

 

पहाड़ों से बहा तो जल,  गया देखो समंदर में,

जहाँ उसकी जरूरत थी, ठहर जाता तो अच्छा था

 

“मौलिक एवं अप्रकाशित”

 

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 24, 2017 at 10:15am

आदरणीय नन्दकिशोर दुबे जी आपकी उर्जावान प्रतिक्रिया का ह्रदय से आभार

Comment by नन्दकिशोर दुबे on September 23, 2017 at 9:11am
बहुत ही सुन्दर ! द्विपदी का प्रत्येक भाव और अभिव्यक्ति अंदर तक प्रभावित कर गयी ।
Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 20, 2017 at 8:30pm

आदरणीय Niraj Kumar जी आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया, मेहनत सफल हुई , आपको रचना पसंद आई.

Comment by Niraj Kumar on September 20, 2017 at 5:56pm

आदरणीय बसंत जी,

मतले का पहला मिसरा क्लासिकल उर्दू शायरों की याद दिलाता है. आपने बाकी ग़ज़ल में भी इस अंदाज़ को बरकरार रखते हुए हिंदी शब्दों का खूबसूरती से इस्तेमाल किया है.

दाद के साथ मुबारकबाद.

सादर  

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 19, 2017 at 10:30pm

आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका , सादर नमन 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 19, 2017 at 5:16pm
क्या कहने आदरणीय..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई..सादर
Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 19, 2017 at 1:12pm

आदरणीय Samar kabeer जी, आपके सुझाव का  ह्रदय से स्वागत है. सुधार कर दिया है 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 19, 2017 at 1:02pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी हौसला अफजाई के लिए अतिशय आभार आपका, जी अपेक्षित सुधार कर  दिया है 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 19, 2017 at 1:01pm

आदरणीय Shyam Narain Verma जी हौसला अफजाई के लिए अतिशय आभार आपका,

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 19, 2017 at 12:58pm

आदरणीय  SALIM RAZA REWA जी हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया आपका 

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