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मेरा गांव मेरा परिवार

गाँव की चंचल हवा को देखो,मस्त मौली इस फिजा को देखो
इसमें है चाहत के गीत,निश्छल प्रेम विश्वास और प्रीत |
इसमें है चाहत की नैया , बातो में विश्वाश है भैया |
सबके साथ है सबकी मैया ,अपना भी परिवार है भैया|
नाना नानी बड़े सलोने,मामी भी है इन्ही घरो में |
चाची जी का प्यार तो देखो,भाभी का तकरार तो देखो|
बड़ी माँ भी बड़ी सलोनी,प्यार से देती खाना पानी|
छोटी बहाना भी है संग में, उसका प्यार है अपने रंग में|
सुबह को झगडा शाम को प्यार,खिल उठता अपना संसार|
अभी बने हम गिफ्ट देवैया,छुपा छुपा सा प्यार है भैया |
सबके साथ है सबकी मैया,अपना भी परिवार है भैया |
दादी नानीं से सुनी कहानी,जिसमे रजा और है रानी |
मम्मी जी की लोरी देखो,दूध भरी कटोरी देखो |
पापा जी का गुस्सा होना,साथ में खाना साथ में सोना |
प्यार भरा आपना संसार,रिस्तो में होती तकरार |
अपने तो अपने है भैया,चाहत की है अपनी नैया |
सबके साथ है सबकी मैया ,आपना भी परिवार है भैया |
मौलिक एवं अप्रकाशित
आनन्द यादव

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Comment by नाथ सोनांचली on October 2, 2017 at 4:54am
आद0 पंकज जी सादर अभिवादन, पहली बार आपसे रूबरू हो रहा हूँ, भासव अच्छे है, पर कुछ जगह टंकण त्रुटि और शब्द कल पर आपको अभी काम करना है।शेष शुभ शुभ। बधाई
Comment by नाथ सोनांचली on October 2, 2017 at 4:53am
आद0 पंकज जी सादर अभिवादन, पहली बार आपसे रूबरू हो रहा हूँ, भासव अच्छे है, पर कुछ जगह टंकण त्रुटि और शब्द कल पर आपको अभी काम करना है।शेष शुभ शुभ। बधाई
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 29, 2017 at 7:52pm
बढ़िया प्रस्तुति के माध्यम से ग्रामीण परिवेश की सैर कराती बढ़िया रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय पंकज सागर जी। वरिष्ठजन की उपरोक्त टिप्पणियों पर ग़ौर फ़रमाइयेगा।
Comment by Pankaj sagar on September 28, 2017 at 9:27pm
जी धन्यवाद जी
Comment by Samar kabeer on September 28, 2017 at 8:43pm
जनाब पंकज सागर जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
आपको अभी बहुत अध्यन की आवश्यकता है,ओबीओ पर मौजूद आलेखों का लाभ लें ।
Comment by Mohammed Arif on September 28, 2017 at 8:12am
प्रिय पंकज जी आदाब, बड़ी निश्छलता लिए आपकी रचना है । भावों का अच्छा स्फुटन हुआ है । काश, आपकी यह रचना किसी अच्छे से छंद में बँधी होती । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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