For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फटी आंखें (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"तुम अपने काम संभालो! अपने काम निपटा कर मैं आता हूं।" रोज़ाना की तरह आज भी वह शायद वहीं गया था, जहां शंका थी। लक्ष्मी उसकी राह देख रही थी। कितना हंसमुख, सुंदर, ख़ुशमिज़ाज और हृष्ट-पुष्ट भाई है उसका। हम ग़रीबों के पास ये ही तो प्रभु के उपहार हैं। लेकिन रईस हमारी इन नियामतों पर भी डाका डाल देते हैं। लक्ष्मी बड़े भाई के बारे में सोच-सोच कर परेशान हो रही थी।

"भैया, मैं भी अब जवान हो रही हूं। मां-बाप की मज़बूरियां तो समझती हूं, लेकिन कम से कम तुम तो मेरे बारे में सोचो! उस रईस मेम साहब के चक्कर में तुम मेरे लिए भी कोई मुसीबत खड़ी न कर दो!'- वह भाई से केवल इतना ही तो बोल पाई थी।

"पैसों के इंतज़ाम के लिए मैं क्या करता हूं, तुम्हें कुछ पूछने और कहने की ज़रूरत नहीं! पढ़ाई मेरे बस की बात नहीं! तू पढ़ ले, जितना पढ़ सके!" भाई के इस तरह के जवाबों से समस्याओं का कोई हल नहीं निकलने वाला था। लक्ष्मी जानती थी कि उसके भाई के तन-मन और स्वभाव का शोषण किया जा रहा है और उसकी भी बारी आ सकती है।

"चल लक्ष्मी, ये कपड़े और धोले, मैं जा रही हूं काम पर! देर हुई, तो साहब, मेम-साहब दोनों डांट-डपट करेंगे!" इतना कहकर मां भी काम पर चली गई। शून्य में घूरती लक्ष्मी की फटी आंखों में सवाल, कुछ दृश्य और कुछ संकल्प सब एक साथ तैर रहे थे।
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 502

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 19, 2017 at 4:27pm
मेरी इस रचना पर समय देकर अनुमोदन व हौसला अफज़ाई के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय अर्चना गंगवार जी व आदरणीय महेंद्र कुमार जी।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 19, 2017 at 4:26pm
रचना पर समय देकर अपनी राय से अवगत कराने के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी। कृपया अपने सुझाव से मार्गदर्शन भी प्रदान कीजिए।
Comment by Mahendra Kumar on October 6, 2017 at 9:08pm

बढ़िया लघुकथा है आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर.

Comment by Archana Gangwar on October 3, 2017 at 7:06am

बहुत खूब ......कम शब्दों में पूरी बात 

Comment by नाथ सोनांचली on October 2, 2017 at 4:50am
आद0 शेख उस्मानी जी सादर अभिवादन, यह लघुकथा मुझे कुछ क्षण के लिए उलझा कर रख दी, बहरहाल इस उम्दा लघुकथा के लिए बधाई। सादर
Comment by नाथ सोनांचली on October 2, 2017 at 4:49am
आद0 शेख उस्मानी जी सादर अभिवादन, यह लघुकथा मुझे कुछ क्षण के लिए उलझा कर रख दी, बहरहाल इस उम्दा लघुकथा के लिए बधाई। सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service