For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२,१२२२

दिलों पर कुछ ग़मों की हुक़्मरानी अब भी क़ाइम है,
कि निचली बस्तियों में सरगरानी अब क़ाइम है।

हक़ीक़त है कि उनके वास्ते सब कुछ किया हमने,
मगर औरत के लव पर बेज़ुबानी अब भी क़ाइम है।

मैं शादी तो करुँगी, मह्र, वालिद आप रख लेना,
कि अपनी बात पर बिटिया सयानी अब भी क़ाइम है।

यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,
हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।

धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,
लहू के चंद क़तरों में रवानी अब भी क़ाइम है।


मुख़ालिफ़ ज़ुल्म के कुछ लोग जो आए हैं सड़कों पर,
ये जोख़िम ये बताता है, जवानी अब भी क़ाइम है।

ये सच है, मिल गई है उसमें अब बारूद की कुछ बू,
मगर घाटी में खु़शबू जाफ़रानी अब भी क़ाइम है।

कि धरती की हरीरी छीन ली अपनी तरक्क़ी ने, 
मग़र अम्बर की रंगत आसमानी अब भी क़ाइम है।

हमारे गाँव ने ख़ुद को बहुत महफ़ूज़ रक्खा है,
रवायत हर पुरानी से पुरानी अब भी क़ाइम है।

ज़मीनें बेच दीं सब, तर्बियत सारी बचा ली है,
हमारे पास पुरखों की निशानी अब भी क़ाइम है।

मौलिक/अप्रकाशित।

Views: 318

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Balram Dhakar on November 3, 2017 at 11:25am
आदरणीय अफ़रोज़ जी, बहुत बहुत धन्यवाद।
सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 3, 2017 at 10:06am

अच्छी ग़ज़ल कही है आद० बलराम जी . मतले में ईता दोष है गौर कीजिये 

लव-लब 

यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,
हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ायम है।---उला में जब यकीनन कह रहे हैं तो सानी में अब भी कायम है ---क्या विरोधाभास नहीं लग रहा 

ये सच है, मिल गई है उसमें अब बारूद की कुछ बू,-----ये सच है मिल गई उसमे है अब बारूद की कुछ बू ---एसा कर  लें 
मगर घाटी में खु़शबू जाफ़रानी अब भी क़ायम है।----बहुत सुंदर शेर 

नीचे के दोनों शेर में तकाबुले रदीफ़ आ रहा है 

थोड़े से संशोधनों के पश्चात ग़ज़ल निखर उठेगी 

बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by narendrasinh chauhan on November 2, 2017 at 5:48pm

सुंदर रचना

Comment by vijay nikore on November 2, 2017 at 3:20pm

//ज़मीनें बेच दीं सब, तर्बियत सारी बचा ली है,
हमारे पास पुरखों की निशानी अब भी क़ायम है।//

बहुत अच्छी गज़ल कही है। बधाई। यदि शब्दों के मान्य हिन्दी में लिख दें तो और भी अच्छा होगा।

पुन: बधाई।

Comment by Mohammed Arif on November 2, 2017 at 2:26pm
आदरणीय बलराम धाकड़ जी आदाब,ग़ज़ल में दर्द भी है,गाँव भी है, चुभन भी है,परर्यावरणीय संचेतना भी है । कुल मिलाकर बेहतरीन ख़्यालों की फुलवारी । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।
Comment by Afroz 'sahr' on November 2, 2017 at 1:54pm
आदणीय बलराम धाकड़ जी इस रचना पर बधाई आपको,,,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर शक्ति छंद…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल साहब सादर, प्रदत्त चित्र के माध्यम से माता के लिए संतान के महत्व पर प्रकाश…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया मंजीत कौर जी सादर,  प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते उत्तम शक्ति छंद रचे हैं…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते तीनों ही हरिगीतिका छंद आपने…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को आपने शक्ति छंदों के माध्यम से बहुत उत्तम और…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया अनिता शर्मा जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते उत्तम हरिगीतिका छंद रचे हैं आपने.…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय गंगा धर शर्मा जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करती उत्तम प्रस्तुति है यह आपकी. हार्दिक…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "कशमकश से यकबयक" (लघुकथा)
"मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर अपना अमूल्य समय देकर अनुमोदन व हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
"आदाब, मेरे मंचीय ब्लॉग पृष्ठ पर * feature blog post संख्या बदलती रहकर ग़लत संख्या दर्शा रही है काफी…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ही प्रेरक, प्रोत्साहक और हौसला बढ़ाती बेहतरीन रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश कृष्ण…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बेहतरीन शिल्पबद्ध भावपूर्ण रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय  बासुदेव अग्रवाल 'नमन'…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्राधारित भी और प्रतीकात्मक भी। बढ़िया सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया मनजीत कौर साहिबा।"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service