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क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल

(22 22 22 22)

क्यूँ है तू बीमार मेरे दिल

गम से यूँ मत हार मेरे दिल

 

तय है इक दिन मौत का आना

इस सच को स्वीकार मेरे दिल

 

पहले ही से दर्द बहुत हैं

और न ले अब भार मेरे दिल

 

सुनकर भाषण होश न खोना

ये सब है व्यापार मेरे दिल

 

कौन यहाँ पर कब बिक जाए

रहना तू हुशियार मेरे दिल

 

झूठ खड़ा है सीना ताने

सच तो है लाचार मेरे दिल

 

दिल के कोने में रहने दे

प्यार का हक मत मार मेरे दिल

 

होगी उसकी भी मजबूरी

पी ले गुस्सा यार मेरे दिल

 

रिश्तों को तू खूब निभाना

सबसे मिल इक बार मेरे दिल

 

सच्चाई के साथ चलेंगे

हो जा तू तैयार मेरे दिल 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 754

Comment

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Comment by Gurpreet Singh jammu on November 4, 2017 at 11:51am
आदरणीय नादिर खान जी ..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने ..मुबारकबाद क़ुबूल करें

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 3, 2017 at 9:12pm

पहले  से ही  दर्द बहुत हैं

बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई आद० नादिर खान जी दिल से दाद हाजिर है 

Comment by नादिर ख़ान on November 3, 2017 at 4:38pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी आदरणीय विजय निकोर जी आदरणीय जनाब अफ़रोज सह्र साहब आदरणीय जनाब मोहामद आरिफ़  साहब आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया ... आप लोगों के कोमेंट्स से हौसला मिलता है |

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 2, 2017 at 8:24pm
बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय..बधाई
Comment by vijay nikore on November 2, 2017 at 3:24pm

//पहले ही से दर्द बहुत हैं
और न ले अब भार मेरे दिल//

बहुत खूब। अच्छी गज़ल के लिए बधाई।

Comment by Afroz 'sahr' on November 2, 2017 at 9:50am
,जनाब नादिर साहिब शेर दर शेर मुबारकबाद पेश करता हूँ,,
Comment by Mohammed Arif on November 2, 2017 at 7:46am
झूठ खड़ा है सीना ताने
सच तो है लाचार मेरे दिल। बहुत ही बढ़िया शे'र
शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय नादिर खान जी ।

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