For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हुआ होगा कुछ आज ही के दिन

भयानक सनसनी अभी अचानक

थम गई

हवा आदतन अंधेरे आसमान में

कहाँ से कहाँ का लम्बा सफ़र तय कर

थक गई

पत्तों की पत्तों पर थपथपी

अब नहीं

रुकी हुई है पत्तों पर कोई अचेत अवस्था

या, असन्तुलनात्मक ख़ामोशी से उपजी

है आज भीतर अनायास उदास अनवस्था

बातों बातों में हम भी

तो रूठ जाते थे कभी

फिर भी हृदय सुनते थे स्वर

कुछ ही पल, आँखों से आँखों में देख

दुलारते

हँस देते थे हम दोनो

लौट आती थी तुम्हारी

स्नेहिल शिशु-नयनों की चमक

बुलाती थी तुम्हारे ओंठों की लाली

युग-युग का अनकहा मानो

कुछ साँसों में कह देती थी

पर अब पाता हूँ स्वयं को असहाय सहसा

तालाब में टूटते बुलबुलों-सा, अनियंत्रित

चार ही दिन की छोटी-सी

तुम्हारी बड़ी बीमारी ...

खुला का खुला रह गया वह कमरा

बर्फ़ीली साँस थी जमी गली-गली

तुम...चली गई

मैं तुम्हें छू न सका

देख-देख खड़ा डरता रहा, फिर चीखा

यह मेरी "इतनी अपनी" को 

"आज" क्या हुआ...यह सच था क्या ?

वह "आज" जिसका फैलाव अब

हर सवाल में, हृदय की थाह में

सिर पर, तन पर

मेरी हर सचाई पर फैला

रुधिर-सी फूट रही यादों के

अधभूले एहसासों के भीतरी अहातों में

कन्धे पर ठहरा, भारी पत्थर के भार-सा

वह "आज" लौट आता नहीं, ठहरा-सा रहता

मन-विवर में अधसूखी पपड़ी के नीचे

गड़ा हुआ

गहरा है घाव

रातों में अंधेरे आकाश में दरारें हो मानो

अकस्मात, सपाट सूने में धुंधला-सा आकार

तुम्हारी बेचैन आँखें

संकेत-भाषा ... मुझको पुकारती

पुचकारती, दुलारती, समझाती

मेरी गलतियों का एहसास भी कराती

बिना किसी शिकायत

कुछ वैसे ही, वही की वही ...तुम

छू लेता हूँ तुम्हारा हाथ, डरा-डरा

सोचता हूँ, तुम्हें रोकूँ

कि न रोकूँ ...

यादें

ठहरी यादों से

कल फिर मिलने का वायदा करती 

भीगे सिरहाने पर

       -------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 113

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:43pm

//जज़्बात की ज़मीन पर शब्दों की बहुत सुंदर और शानदार इमारत तैयार करना आपका कमाल है//

आपसे मिले इस स्नेह के लिए हृदयतल से आभार, आदरणीय भाई समर जी।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:41pm

//शानदार भाव और मर्मस्पर्शी संवेदनाओं से परिपुर्ण रचना//

सरहाना के लिए आपका आभारी हूँ, आदरणीय मोहित जी।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:40pm

//इस बेमिसाल प्रस्तुति पर आपको दिल से हार्दिक बधाई//

सरहाना के लिए आपका आभारी हूँ, आदरणीय सुशील जी।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:39pm

//अनिवर्चनीय//

आपका यह एक शब्द मेरे लिए अमूल्य है, मेरे भाई गोपाल नारयन जी।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:38pm

//भूली बिसरी यादों को दर्शाती सुन्दर रचना//

तस्दीक़ अहमद साहब, आपका हार्दिक आभार। आशा है आपका स्नेह मिलता रहेग।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:35pm

//बहुत ही बेहतरीन अहसासों की ख़ुशबू से महकी हुई प्यार कुछ-कुछ बिछोह की अवस्था//

इस मान औए स्नेह के लिए आभारी हूँ, आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।

Comment by Samar kabeer on November 24, 2017 at 10:57am
जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,जज़्बात की ज़मीन पर शब्दों की बहुत सुंदर और शानदार इमारत तैयार करना आपका कमाल है,हमेशा की तरह ये कविता भी मन को छूती हुई गुज़री,इस बहतरीन प्रस्तुति पर दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohit mishra (mukt) on November 24, 2017 at 9:12am
वाह आदरणीय विजय सर वाह। शानदार भाव और मर्मस्पर्शी संवेदनाओं से परिपुर्ण रचना। बधाई
Comment by Sushil Sarna on November 23, 2017 at 8:02pm

यादें
ठहरी यादों से
कल फिर मिलने का वायदा करती
भीगे सिरहाने पर

अप्रतिम अप्रतिम अप्रतिम ...
यादों के शानों पर
जाने क्या क्या
रख दिया आपने
नाउम्मीदी के सायों को
अपनी आफ़ताबी कलम से
ढक दिया आपने

इस बेमिसाल प्रस्तुति पर आपको दिल से हार्दिक बधाई आदरणीय विजय निकोर साहिब।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 23, 2017 at 7:42pm

आआ० निकोरे जी , बस इतना ही कहूंगा - अनिवर्चनीय .    सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post मॉरिशस में हिंदी साहित्यिक समारोह (राजेश कुमारी राज )
"आद० तेजवीर सिंह जी आपकी शुभकामनाएँ मेरे लिए सम्बल है जो मुझमे लेखन के लिए नव ऊर्जा संचारित करती हैं…"
1 minute ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आद० मनजीत कौर जी अच्छे शक्ति छंद रचे हैं हार्दिक बधाई मग्न को मगन कर लें "
6 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह्ह्ह आद० छोटे लाल जी प्रदत्त विषय को सार्थक करते हुए शक्ति छंद में बहुत अच्छी प्रस्तुति बहुत…"
9 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"सहभागिता के लिए बधाई आपको हरिहर झा जी ,किन्तु शक्ति छंद या हरिगीतिका पर लिखना था इस आयोजन में "
12 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद न सोचा जिसे था ,विपत वो पड़ी नदी रूप धरकर भयानक खड़ी न सूझे हमें अब कि जाएं कहाँ नदी बीच…"
17 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आद० अनीता जी छंद पर बहुत अच्छा प्रयास है बस कथ्य को और परिष्कृत करने की गुंजाइश है बाकी हार्दिक…"
23 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र को हर कोण से परिभाषित किया है आपने आदर्णीय गंगा धर जी बहुत खूब हार्दिक बधाई आपको "
28 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"छंद -हरिगीतिका  माँ के लिए संतान ही उसका सकल संसार है उसकी सुरक्षा के लिए करती हदें सब पार…"
36 minutes ago
Harihar Jha posted blog posts
2 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
2 hours ago
vijay nikore posted a blog post

आशंका के गहरे-गहरे तल में

आशंका के गहरे-गहरे तल मेंआयु के हज़ारों लाखों पलों के दबे ढेर मेंनए कुछ पुराने दर्दों की कानों में…See More
2 hours ago
Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर कविता!   छोटेलाल जी! छन्दबद्ध!"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service