For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 1212 22
उसकी खुशबू तमाम लाती है ।।
जो हवा घर से उसके आती है ।।

आज मौसम है खुश गवार बहुत ।
बे वफ़ा तेरी याद आती. है ।।

कितनी मशहूर हो गई है वो ।
कुछ जवानी शबाब लाती है ।।

टूटकर. मैं भी कशमकश में हूँ।
रात उलझन में बीत जाती है ।।

ओढ़ लेती बड़े अदब से वो ।
जब दुपट्टा हवा उड़ाती है ।।

यूँ तमन्ना तमाम क्या रक्खूँ ।
जिंदगी रोज तोड़ जाती है ।।

हम भी दीवानगी से हैं गुजरे ।
जिंदगी मोड़ ढूढ लाती है ।

जुल्फ अपनी सियाह कर लेकिन ।
उम्र रंगत तेरी बताती. है ।

इश्क छिपता नही छिपाये से ।
कुछ निशानी भी बोल जाती है।।

उम्र कमसिन जरा सभल चलो।
आशिकी रोज आजमाती है ।।

मत करो याद इतनी शिद्दत से ।
नींद मेरी भी टूट जाती है ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 608

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on November 29, 2017 at 7:42am
आ0 राम अवध विश्वकर्मा साहब । हाँ यह भूल हो गई थी । अब इसे यूँ पढ़ें ।
यूँ तमन्ना तमाम क्या रक्खूँ ।
जिंदगी रोज तोड़ जाती है ।।

एडिट कर रहा हूँ।
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on November 28, 2017 at 8:01pm
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई लेकिन
बेसबब बात बदल जाती है
मेरे ज्ञान के अनुसार बह्र में नहीं है।क्योंकि फाइलातुन फइलातुन फैलुन में यह मिसरा है जबकि सभी मिसरे फाइलातुन मफाइलुन फैलुन में हैं। सादर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 28, 2017 at 7:05pm
हार्दिक बधाई ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on November 27, 2017 at 3:59pm
आदरणीय सर सादर नमन । कीमती इस्ला हेतु कोटि कोटि आभार ।
Comment by Samar kabeer on November 27, 2017 at 3:01pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
तीसरे शैर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ।
चौथे शैर में 'कसमकस' को "कशमकश" कर लें ।

'उम्र कमसिन ज़रा सभल चलो'
ये मिसरा बह्र से ख़ारिज है, यूँ कर लें :-
'उम्र कमसिन ज़रा सँभल के चलो'

'नींद मेरी भी टूट जाती है'
इस मिसरे को यूँ कर लें :-
'नींद आँखों से रूठ जाती है'
Comment by Naveen Mani Tripathi on November 26, 2017 at 1:17pm
आ0 कालीपद प्रसाद मण्डल साहब तहे दिल से शुक्रिया ।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 26, 2017 at 9:22am

मत करो याद इतनी शिद्दत से ।
नींद मेरी भी टूट जाती है ।। वाह्ह वह्ह्ह  बेहतरीन ग़ज़ल आ नवीन  मणि त्रिपाठी जी 

Comment by Naveen Mani Tripathi on November 25, 2017 at 8:07pm
आ0 बहन रक्षिता सिंह जी सादर आभार ।
Comment by रक्षिता सिंह on November 25, 2017 at 1:14pm
उम्र कमसिन जरा सभल चलो।
आशिकी रोज आजमाती है ।।
आदरणीय नवीन जी,
बहुत ही खूबसूरत गज़ल,
दिली मुबारकबाद।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
9 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
9 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
9 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
15 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
15 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
16 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
19 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
20 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
20 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
20 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
20 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
20 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service