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पेड़ उखड़ते तूफानों में, दूब हँसे हर बार (सरसी छःन्द)

अंधी दौड़ आधुनिकता की, गली नगर या गाँव
ना बरगद के पेड़ दिखें अब, ना पीपल की छाँव।।

संस्कार बिना इंसान यहाँ, चलती फिरती लाश
बिना नींव का हवामहल भी, गिरते जैसे ताश।।

अर्धनग्न अब देह बनी है, फैशन की पहचान
भूल गए सब जड़ें पुरातन, पढ़े लिखे नादान।।

सूर्य उदय पूरब से होता, पर पश्चिम में अस्त
उदय अस्त का सत्य जान लो, वरना होगे त्रस्त।।

दरक रहे हैं नित्य यहाँ पर, संस्कारो के दुर्ग
भूल रहे हैं बात पुरातन, बच्चे युवा बुजुर्ग।।

जुड़ा नहीं जो मिट्टी से है, सहे कुदरती मार
पेड़ उखड़ते तूफानों में, दूब हँसे हर बार ।।

भेद मतों में है गर कोई, गलत नहीं ये बात
हुई मगर वाणी कर्कश तो, बिगड़ें सब हालात।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on November 28, 2017 at 7:16pm
आद0 आली जनाब समर कबीर साहब सादर प्रणाम। छंन्द पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफ़जाई का हृदय तल से आभार। आपकी समीक्षा मिल जाने से गलती सुधारने में मुझे मदद मिलती है। आपकी प्रतिक्रिया का मुझे बेसब्री से इंतिजार रहता है।

//पहले छन्द के तीसरे छन्द में 'संस्कार'शब्द की मात्रा मेरे नज़दीक 6 होती हैं// संस्कार क़ई मात्रा जहाँ तक मैंने पढ़ा है 5 होती है, पर चीत्कार, संस्कार जैसे शब्द पर पढ़ते समय वजन मुझे भी इसके वजन के बारे में शंशय पैदा करते हैं। पिछली बार के चित्र से काव्य में आद0 गोपाल जी और आद0 रामबली जी ने इस पर चर्चा भी की थी।
आपके सुझावनुसार परिवर्तन करता हूँ। सादर
Comment by Samar kabeer on November 28, 2017 at 5:12pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा सरसी छन्द लिखे,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
पहली पंक्ति में 'शहर'को "नगर"करना उचित होगा ।
पहले छन्द के तीसरे छन्द में 'संस्कार'शब्द की मात्रा मेरे नज़दीक 6 होती हैं ,इसी छन्द के चौथे पद में 'गिरता जैसे ताश'को "गिरते जैसे ताश"होना चाहिए,क्योंकि "ताश"शब्द बहुवचन है, बावन पत्ते मिलकर ताश कहलाते हैं ।
Comment by नाथ सोनांचली on November 28, 2017 at 8:26am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन, छन्द पर आपकी उपस्थिति और बेह्तरीन प्रतिक्रिया से हौसला अफजाई करने के लिए हृदय तल से आभार।
Comment by Mohammed Arif on November 28, 2017 at 7:58am
आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब,
चिंता-बेचैनी, परिवर्तन की आग, फैशन,बदलाव और प्रकृति सबकुछ समा दिया आपने इन छंदों में । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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