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कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता

जीवन में निज यत्न से, करिये ऐसे काम।
आप रहें या ना रहें, रहे सदा पर नाम।
रहे सदा पर नाम, नया इतिहास बनाएँ।
बनें जगत प्रतिमान, लोग यश गाथा गाएँ।
अगर समर्पण-स्नेह-धैर्य-साहस रख मन में।
हों इस हेतु प्रयास, सफल होंगे जीवन में।।1।।

जग में कठिन न है सखे, करना कोई काम।
दृढ निश्चय कर के बढ़ो, होगा जग में नाम।।
होगा जग में नाम, लक्ष्य पाना जो ठानो।
हर बाधा स्वयमेव, मिटेगी सच यह मानो।।
गिरि-सरि आयें राह , चुभें या काँटें पग में।
लक्ष्य प्राप्त कर मान, बढ़ाओ अपना जग में।।2।।

रचना-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 13, 2017 at 6:46pm

बधाई आदरणीय रामबली गुप्ता जी। सुंदर कुण्डलिया हुई हैं

Comment by डॉ पवन मिश्र on December 13, 2017 at 4:16pm

आद0 रामबली जी, सुंदर सर्जना हेतु बधाई प्रेषित है।

Comment by Mohammed Arif on December 13, 2017 at 2:27pm

आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब ,

                                     हौसला बढ़ाती , राह की बाधाओं को पार करने का साहस जगाती बहुत ही सशक्त कुंडलियाँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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