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विश्वसनीयता(लघु कथा)

मैं ,मैं हूँ।समझी ,कि नहीं?
-और मैं क्या हूँ,पता है?
-जरूर,पर हवाला मेरा ही दिया जाता है,तेरा नहीं।
-वो बात दीगर है।
-सच है।
-है,पर दिखने और होने में फर्क होता है।
-मतलब?
-तू समझता है।
-अरी, मेरे बिना तो सरकारें तक नहीं चलतीं, हिल जाती हैं।
-वही तो।तू पाला बदलता रहता है,मैं तिलमिलाती रहती हूँ।
-तो तुझे क्यों मलाल होता है?
-क्योंकि तू भौतिकता का कायल हो सकता है,हो भी जाता है।
-और तू?
-मैं तो भाव निरूपित करती हूँ।भाववाचक हूँ',विश्वसनीयता बोली।
विश्वास का मुँह लाल हो गया।रंगत गुस्से की थी या लज्जा की,वह तय नहीं कर पा रहा था।
"" मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Manan Kumar singh on January 2, 2018 at 10:02am

बहुत बहुत आभार जनाब उस्मानीजी।नव वर्ष की शुभ कामनाएं।

Comment by Manan Kumar singh on January 2, 2018 at 10:01am

आदरणीय सुरेन्द्र जी,आपका शुक्रिया।नव वर्ष की मंगलकामनाये।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 2, 2018 at 9:05am

वाह! जाते साल और नव वर्ष के आगाज़ पर 'विश्वास' और ' विश्वसनीयता' के कथनोपकथन में उन दोनों को ही परिभाषित करते हुए देश और जीवन का यथार्थ चित्रित करती बेहतरीन विचारोत्तेजक सारगर्भित लघुकथा के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मनन कुमार सिंह साहिब। दरहक़ीक़त दिखने और होने में फर्क होता है। हार्दिक आभार। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

Comment by नाथ सोनांचली on January 1, 2018 at 2:12pm

आद0 मनन कुमार जी सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओ संग बहुत बहुत बधाई

Comment by Manan Kumar singh on December 31, 2017 at 8:09pm

आभार एवं नव वर्ष की मंगलकामनाये आरिफ भाई।

Comment by Mohammed Arif on December 31, 2017 at 7:52pm

आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,

                     सशक्त लघुकथा । बधाई स्वीकार करें ।

                 नववर्ष की शुभकामनाएँ !

Comment by Manan Kumar singh on December 31, 2017 at 6:35pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय तेजवीर जी।नवल वर्ष मंगलमय हो!

Comment by TEJ VEER SINGH on December 31, 2017 at 6:21pm

हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।बेहतरीन प्रस्तुति। एक कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती रचना।

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