For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )

ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
----------------------------------------------------------
(फऊलन-फऊलन-फऊलन-फऊलन)

चलाओ न तीरे नज़र तीरगी में |
निकल कर तो आओ कभी रोशनी में |

कमी दर्दे दिल में तो अब भी नहीं है
मज़ा आ रहा है तुम्हें दिल लगी में |

मेरी ही नहीं है यह सबकी ज़ुबा पर
लुटे क़ाफ़िले सब तेरी रहबरी में |

करूँ फ़ख़्र मैं क्यूँ न क़िस्मत पे अपनी
दिवाना हुआ हूँ तुम्हारी गली में |

यूँ ही कोई तुझ पर नहीं मर मिटा है
कोई बात तो है तेरी सादगी में |

कभी मेरी बालीं पे सज धज के आओ
क़ियामत भी मैं देख लूँ ज़िंदगी में |

लगा कर गले मुझको तस्दीक़ उसने
नई रूह फिर फूँक दी दोस्ती में |

तीरगी --अंधेरा , बालीं--सिरहाने

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 129

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 24, 2018 at 11:52am

जनाब महेन्द्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 24, 2018 at 11:51am

जनाब बलराम साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mahendra Kumar on January 23, 2018 at 7:32pm

बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. तस्दीक़ जी. सादर.

Comment by Balram Dhakar on January 23, 2018 at 6:28pm
आदरणीय तस्दीक जी, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल।
हार्दिक बधाई।
सादर।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 23, 2018 at 9:47am

जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 23, 2018 at 4:35am

आद0 तस्दीक अहमद साहिब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 22, 2018 at 9:53am

जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on January 22, 2018 at 9:04am
जनाब तस्दीक़ साहब,
हर एक शेर ख़ूबसूरत वाह क्या कहने मुबारक़बाद क़ुबूल करें.
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 20, 2018 at 8:19am

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on January 20, 2018 at 7:57am

आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,

                          बहुत ही प्यारी ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
" आदरनीय नमन जी, बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई हो "
2 minutes ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब नादिर खान साहिब, ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवज़ी का शुक्रिया,,,"
2 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय सुरेंद्र जी, शानदार गजल। बधाइयाँ।  रोल, अगर अंग्रेजी वाला शब्द है तो विकल्प देखिए।"
2 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"धन्यवाद आ. गजेंद्र जी"
2 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"वाह अफरोज सहर साहिब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है। शेर दर शेर मुबारकवाद हाजिर है।"
3 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"शुक्रिया आ. मोहन बेगोवाल जी"
5 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय अफरोज साहब, उम्दा गजल हुई। बधाइयाँ"
5 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"शुक्रिया आ. मोहम्मद आरिफ़ साहब"
5 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय अफ़रोज़ सहर जी आदाब,                    …"
5 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब,                   बेहतरीन ग़ज़ल…"
7 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय महमूदाबाद साहब। बेहतरीन गजल के लिए बधाइयाँ। दाग़ आने लगे नज़र खुद ही । आईना वो दिखा गया है…"
7 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आइना वो दिखा गया है मुझेकिस अदा से रुला गया है मुझे। ख्वाब रंगीं दिखा के गुलशन काइक कफ़स में फँसा…"
8 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service