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ग़ज़ल (शिकायत भला हम करें क्या किसी से )

ग़ज़ल (शिकायत भला हम करें क्या किसी से )
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(फऊलन- फऊलन-फऊलन-फऊलन)

चुने हैं ग़मे यार अपनी ख़ुशी से |
शिकायत भला हम करें क्या किसी से |

मिले सिर्फ़ धोके ही अपनों से हम को
वफ़ा अब करेंगे किसी अजनबी से |

खिज़ाओं ख़बरदार उनकी है आमद
सदा फूल खिलते हैं जिनकी हँसी से |

मिला कर नज़र से नज़र यह बताएँ
हुआ दिल ये बर्बाद किस की कमी से |

कभी दोस्तों पर न इतराना हर गिज़
सबक़ हमने सीखा तेरी बे रुखी से |

वही सिसकियाँ और वही चन्द आँसू
मिला और क्या है तेरी दिल बरी से |

यही तज्रबा भी है तस्दीक़ मेरा
बना काम बिगड़े सदा आश्ती से |

आश्ती --सुलह

( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 24, 2018 at 2:36pm

जनाब सुरेन्द्र इंसान साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई
का बहुत बहुत शुक्रिया | किसी भी मुआम्ले में अगर लोगों के मशवरे से सुलह
की जाती है , तो अक्सर काम बिगड़ता ही है , बनता नहीं , यही उस शेर मे
इशारा किया गया है |

Comment by surender insan on January 24, 2018 at 12:33pm

वाह जी बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है जी बधाई कबूल करे जी। सादर नमन जी ।

आख़री  मिसरे में क्या कहा गया मैं समझ नही पाया। हालांकि आशती का अर्थ भी पढ़ा। सादर जी।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 24, 2018 at 11:53am

जनाब महेंद्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mahendra Kumar on January 23, 2018 at 7:26pm

बढ़िया ग़ज़ल है आ. तस्दीक़ जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 22, 2018 at 9:55am

जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on January 22, 2018 at 9:07am
जनाब तस्दीक़ साहब,
मतला से मक़ता तक ख़ूबसूरत शेर...... वाह क्या कहने मुबारक़बाद क़ुबूल करें.
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 20, 2018 at 8:04pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 20, 2018 at 3:19pm

आदरणीय तस्दीक साहब बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है..सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 19, 2018 at 12:13pm

जनाब आमोद बिंदोरी साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on January 19, 2018 at 12:01pm
  • Wahh bahut khub 

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