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ग़ज़ल( उठ न जाए क़ियामत नये साल में )

ग़ज़ल( उठ न जाए क़ियामत नये साल में )
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( फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन)

उन पे आई बुलूगत नये साल में |
उठ न जाए क़ियामत नये साल में |

भूल बैठे पुरानी अदावत को वो
देख कर मेरी मिन्नत नये साल में |

बाग़बाने चमन ज़ुल्म से बाज़ आ
वरना होगी बग़ावत नये साल में |

दिल में घर कर नहीं पाएँ शिकवे कभी
डालिए एसी आदत नये साल में |

राह तकता हूँ मुद्दत से इस आस पर
वो करेंगे इनायत नये साल में |

मिल न पाए वो पिछ्ले बरस क्या हुआ
आज़माएँगे क़िसमत नये साल में |

हो गई ईद तस्दीक़, एसा लगा
देख कर उनकी सूरत नये साल में |

बुलूगत ---जवानी , मिन्नत --खुशामद

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 4, 2018 at 9:42am

जनाब लक्ष्मण धामी साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 4, 2018 at 9:40am

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 3, 2018 at 11:05pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 3, 2018 at 10:38pm

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय..सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 2, 2018 at 8:14pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on January 2, 2018 at 5:47pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 2, 2018 at 3:50pm

जनाब अफ़रोज़ साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Afroz 'sahr' on January 2, 2018 at 12:03pm
उम्दा कलाम जनाब तस्दीक़ साहिब बधाई स्वीकार करें।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 2, 2018 at 10:56am

जनाब पंकज साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया , साथ ही नए साल की बधाई ।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 2, 2018 at 9:00am

आदरणीय तस्दीक अहमद सर बहुत-बहुत बधाई इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए

कृपया ध्यान दे...

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