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विधाता छंद में एक गीत

विधाता छंद वाचिक मापनी का छंद है जिसमे 14, 14 मात्राओं पर यति और दो-दो पदों की तुकांतता होती है। इसका मापनी

1222 1222 1222 1222

पड़े जब भी जरूरत तो, निभाना साथ प्रियतम रे

सुहानी हो डगर अपनी, मिले मुझको न फिर गम रे

बहे सद प्रेम की सरिता, रगों में आपके हरदम

नहाता मैं रहूँ जिसमें, मिटे सब क्लेश ऐ हमदम

बने दीपक अगर तुम जो, शलभ बनके रहूँगा मैं

मिलेगी ताप जो मुझको, वहीं जल के मरूँगा मैं

फकत इतनी इबादत है, जुड़े तन मन सघनतम रे

सुहानी हो डगर अपनी, मिले मुझको न फिर गम रे

रहों ना पास जो तुम तो, कमी लगती किसी की है

शिकायत का न दूँ अवसर, तमन्ना बस इसी की है

फँसे नैया भँवर में जब, सहज पतवार बन जाना

जलाकर दीप आशा का, मृदुल तू यार बन जाना

अपरिमित सिंधु सा रहना, सरस मन रूप हरदम रे

सुहानी हो डगर अपनी, मिले मुझको न फिर गम रे

मिले इक छाँव पलकों का, रहूँ तेरी पनाहों में

दुआ माँगू सदा रब से, मरूँ भी नाथ बाहों में

हवाएँ तेज हो कितनी, सहज चलते रहे हमदम

बहे गर वक़्त की आँधी, कभी बुझने न पाएँ हम

अलग ना कर सके कोई, रहें इतने निकटतम रे

सुहानी हो डगर अपनी, मिले मुझको न फिर गम रे

अगर तुम सामने जो हो, मरुस्थल भी लगे उपवन

मिले अहसास जो तेरा, बजे झंकार फिर तन मन

खिले सब फूल बागों के, स्वरों के भी सजे सरगम

चहक जाएं परिंदे भी, सुहावन देख कर मौसम

जले दीदार का दीपक, खुशी ना हो कभी कम रे

सुहानी हो डगर अपनी, मिले मुझको न फिर गम रे

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 1, 2018 at 3:14pm

बहुत सुंदर रचना हुई है , आ. हार्दिक बधाई।

Comment by नाथ सोनांचली on January 29, 2018 at 12:45pm

आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। सामान्यतयः कोई भी गीत चार पदों के ही लिखे जाते है, जिसका ही मैंने अनुपालन किया है। आप शृंगारिक किसी गीत को देखिए , उसके कितने पद होते है,?? 

आपकी प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन के लिए हृदय तल से आभार।सादर

Comment by Mohammed Arif on January 29, 2018 at 11:06am

आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब,

                               विधाता छंद में बंधी बहुत ही अच्छी भावाभिव्यक्ति । छंद काफी लंबा हो गया है जिसके कारण कुछ बोरियत-सी लगती है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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