For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विचार-मंथन के सागर में (अतुकान्त कविता)

"लोकतंत्र ख़तरे में है!
कहां
इस राष्ट्र में
या
उस मुल्क में!
या
उन सभी देशों में
जहां वह किसी तरह है!
या जो कि
कठपुतली बन गया है
तथाकथित विकसितों के मायाजाल में,
तकनीकी, वैज्ञानिकी विकास में! या
ब्लैकमेलिंग- व्यवसाय में!
धरातल, स्तंभों से दूर हो कर
खो सा गया है
कहीं आसमान में!
दिवास्वप्नों की आंधियों में,
अजीबोग़रीब अनुसंधानों में!


"इंसानियत ख़तरे में है!
कहां
इस मुल्क में
या
उस राष्ट्र में!
या
उन सभी देशों में
जहां वह किसी तरह है!
या जो कि
कठपुतली बन गयी है
शैतानों के मायाजाल में!
कुसंस्कारों, भ्रष्टाचरणों के विकास में!
धार्मिक-स्तंभों, तहज़ीब से दूर हो कर
बस रो रही है निरंतर
आत्मा संग
कहीं
निर्जीव से मानव-शरीर में!
या
धार्मिक-साहित्यिक किताबों में,
विभिन्न विधाओं में!
ताल्लुक है दोनों का
ज़मीनी हक़ीक़तों में!
दुनियावी हालात में
इंसानियत और लोकतंत्र
के द्वंद्व में!
विचार-मंथन के सागर में!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 198

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by babitagupta on June 10, 2018 at 1:02pm

जीर्ण शीर्ण होती लोकतांत्रिक व्यवस्था से देश के बदतर होते हालात का बहुत ही सटीक शब्दों में द्रश्तिपात करना,लाजबाव रचना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय सर जी.

Comment by Rohit Dubey "योद्धा " on June 5, 2018 at 7:49pm

katu satya kaha aapne is kavita ke dwara ! Abhar!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 13, 2018 at 3:10pm

मेरी इस अतुकान्त कविता को यहां चयनित करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 26, 2018 at 2:09pm

मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर समय देकर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब विजय निकोरे साहिब और जनाब डॉ. छोटे लाल सिंह साहिब।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on April 26, 2018 at 9:05am
आदरणीय शेख शाहजाद साहब यथार्थ का अद्भुत चित्रण किया आपने दिली मुबारकबाद कुबूल कीजए
Comment by vijay nikore on April 26, 2018 at 2:14am

इस विषय पर लिखना आसान नहीं है, फिर भी आपकी रचना अपने लक्ष्य में सफ़ल हुई है ... चिंतन के लिए बहुत कुछ दे रही है। हार्दिक बधाई भाई शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 24, 2018 at 2:55am

मेरी इस आकस्मिक सृजन पर समय देकर अनुमोदन और स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब डॉ.  आशुतोष मिश्रा साहिब, जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब और मुहतरमा नीलम उपाध्याय साहिबा।

Comment by Mohammed Arif on April 23, 2018 at 5:50pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                              लोकतंत्र की दशा और दिशा को लेकर , देश के हालातों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मौलिक नज़रिये से अतुकांत कविता में झाँकने का बेहतरीन और सफलतम प्रयास । इस प्रयास हेतु बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 23, 2018 at 10:58am

आदरणीय उस्मानी  जी ।  हमेशा की तरह बहुत ही शानदार रचना की प्रस्तुति।  हार्दिक बधाई

"कुसंस्कारों, भ्रष्टाचरणों के विकास में!
धार्मिक-स्तंभों, तहज़ीब से दूर हो कर
बस रो रही है निरंतर
आत्मा संग
कहीं
निर्जीव से मानव-शरीर में!"

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 23, 2018 at 10:49am

आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी आपकी शानदार लघुकथाओं की तरह शानदार यह अतुकांत रचना चिंतन के लिए बिबश करती है इस शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"सम्मानित मंच/तरही मुशायरा संचालक महोदय ओबीओ लाइव तरही मुशायरे के हीरक जयंती अंक के शानदार सफल आयोजन…"
1 hour ago
Ajay Tiwari replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणाप्रताप जी, संकलन की त्वरित प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.   ग़ज़ल सं.…"
4 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"जनाब राणा प्रताप साहिब, इस त्वरित संकलन और बेहद कामयाब आयोजन के लिए आपको ढेरों बधाईयाँ"
5 hours ago
Ajay Tiwari replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणाप्रताप जी, संकलन की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.   मेरी दूसरी ग़ज़ल का ये…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दुख बयानी है गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई विजय निकोर जी, गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार ।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आ. भाई राणा प्रताप जी, गजल संख्या ग्यारह (11) के 6 शेर की दूसरी पंक्ति में "झट से पल में'…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आ. भाई राणा प्रताप जी, त्वरित संकलन के लिए कोटि कोटि बधाई । नेट की समस्या ने अनेक गजलों तक पहुँचने…"
5 hours ago
Krishnasingh Pela shared Admin's discussion on Facebook
5 hours ago
Krishnasingh Pela shared Admin's discussion on Facebook
5 hours ago
Krishnasingh Pela shared Admin's discussion on Facebook
5 hours ago
नादिर ख़ान replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप साहब क्या कहने इधर मुशायरा ख़त्म हुआ उधर संकलन तैयार है  बड़ी रेज़ सर्विस है…"
5 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"इस सफल आयोजन के लिए सभी को हार्दिक बधाई| आदरणीय समर भाई जी को विशेष बधाई |  बहुत उम्दा गज़लें…"
5 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service