For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ 
.
बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
बहुत मुश्किल है ऐबों को मगर उस के निभा लेना.
.
नज़र मिलते ही उस का झेंप कर नज़रें चुरा लेना,
मचलती मौज का जैसे किसी साहिल को पा लेना.
.
बहुत वादे वो करता है मगर सब तोड़ देता है,
ये दावा भी उसी का है कि मुझ को आज़मा लेना.
.
मलंगों सी तबीयत है सो अपनी धुन में रहता हूँ   
पिये हैं रौशनी के जाम फिर ग़ैरों से क्या लेना.
.
मिलन होगा मुकम्मल जब मिलेगी बूँद सागर से
उस इक पल दरमियाँ से तुम बदन अपना हटा लेना.
.
निलेश "नूर"
मौलिक / अप्रकाशित 

Views: 753

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 10:21am

धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 10:20am

धन्यवाद आ. हर्ष जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 10:20am

धन्यवाद आ. बृजेश जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 29, 2018 at 10:03am

आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन गजल हुई है , हार्दिक बधाई।

Comment by Harash Mahajan on April 28, 2018 at 2:39pm

वाह आदरणीय नूर साहब दिल को छू गयी आपकी पेशकश ।

आपने जो मतला पेश किया है :

"बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना, 
बहुत मुश्किल है ऐबों को मगर उस के निभा लेना."

इस शेर पर मुझे असल रिश्ते को संभाल के रखने का फार्मूला याद आ गया ।जिसमें हम कहा करते थे कि दोस्ती में पॉज़िटिव और नेगेटिव सब अपनाओ तभी रिश्ता ठीक रहता है ।

हर सगर उम्दा ।

दाद ।

सादर ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 27, 2018 at 4:35pm

वाह आदरणीय नीलेश जी खूबसूरत ग़ज़ल कही...लेकिन प्यार पा लेना इतना भी आसान नहीं है...सिर्फ मजाक में लें।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 26, 2018 at 11:48pm

धन्यवाद आ. श्याम जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 26, 2018 at 11:48pm

धन्यवाद आ. डॉ आशुतोष जी 

Comment by Shyam Narain Verma on April 26, 2018 at 4:15pm
बहुत खूबसूरत अशआर ...दिल से बधाई 
Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 26, 2018 at 10:24am

आदरणीय भाई निलेश जी आजकल एक के बाद एक उम्दा ग़ज़लें पढने को मिल रही हैं ..रचना पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
15 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
16 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
18 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। भाई तिलकराज जी द्वार…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए आभार।…"
22 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"तितलियों पर अपने खूब पकड़ा है। इस पर मेरा ध्यान नहीं गया। "
22 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी नमस्कार बहुत- बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त निकाला विशेष बधाई के लिए भी…"
23 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service