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ग़ज़ल नूर की - आपने भी तो कहाँ ठीक से जाना मुझ को

आपने भी तो कहाँ ठीक से जाना मुझ को
खैर जो भी हो, मुहब्बत से निभाना मुझ को.
.
जीत कर मुझ से, मुझे जीत नहीं पाओगे
हार कर ख़ुद को है आसान हराना मुझ को.
.
मैं भी लुट जाने को तैयार मिलूँगा हर दम
शर्त इतनी है कि समझें वो ख़ज़ाना मुझ को.
.
आप मिलियेगा नए ढब से मुझे रोज़ अगर
मेरा वादा है न पाओगे पुराना मुझ को.
.
ओढ़ लेना मुझे सर्दी हो अगर रातों में
हो गुलाबी सी अगर ठण्ड, बिछाना मुझ को.
.
मुख़्तसर है ये तमन्ना कि अगर जाँ निकले
आप की गोद का मिल जाए सिरहाना मुझ को.
.
कर सराबोर मुझे मुझ में बरस कर ऐ ‘नूर’
अपनी बस्ती में कहीं दे दे ठिकाना मुझ को
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 4, 2018 at 11:26am

आभार आ. समर सर 

Comment by Samar kabeer on May 4, 2018 at 11:20am

बधाई हो निलेश जी ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 4, 2018 at 11:00am


मेरी ग़ज़ल को फीचर्ड blogs में शामिल करने के लिए शुक्रिया आ. प्रधान सम्पादक जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 3, 2018 at 11:01am

धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 3, 2018 at 11:01am

धन्यवाद आ. तेजवीर सिंह जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 2, 2018 at 6:14pm

आ. भाई नीलेश जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 1, 2018 at 9:28am

हार्दिक बधाई आदरणीय नीलेश जी। बेहतरीन गज़ल।

मुख़्तसर है ये तमन्ना कि अगर जाँ निकले 
आप की गोद का मिल जाए सिरहाना मुझ को. 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 1, 2018 at 8:55am

आ. तस्दीक़ अहमद साहब,
सिरहाने या सिरहाना लिखने में यूँ ही लिखा जाता है लेकिन पढ़ते समय सिराना पढ़ा जाता है ..जैसे चेहरे का ह लोप हो जाता है ..
मीर का शेर देखकर ही वज़न तय किया है मैंने ..देखिएगा ..
.

सिरहाने 'मीर' के आहिस्ता बोलो

अभी टुक रोते रोते सो गया है....
अत: न काफिये में कोई  त्रुटी है और न बहर में ..
सादर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 1, 2018 at 8:52am

धन्यवाद आ. मोहम्मद आरिफ साहब,
आपकी टिप्पणी से उत्साहवर्धन हुआ है 
आभार 

Comment by Mohammed Arif on May 1, 2018 at 7:40am

आदरणीय नीलेश जी आदाब,

                       लगातार क्रिस गेल के चौकों-छक्कों की मानिंद धुआँधार आपीएल आपकी ग़ज़लों का हो रहा है । लगता है इसे अब रोक पाना बड़ा है । वैसे भी म.प्र. के लगभग सभी ज़िलों का तापमान भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है । 

                                              हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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