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प्रसंग था 'दशा और 'बोध ' किसे कहते हैं ? जिज्ञासु और दार्शनिक के बीच इस विषय को लेकर काफी वाद-विवाद चला । जिज्ञासु दार्शनिक के तर्कों से संतुष्ट नहीं हो रहा था । अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर जिज्ञासु अभिभूत हो गया । दार्शनिक ने उंगली से चींटियों के जाते हुए झुण्ड की ओर इशारा कर दिया ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on April 26, 2018 at 7:20am

 हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by vijay nikore on April 26, 2018 at 2:10am

इतनी "लघु" लघु कथा और इतना बड़ा संदेश ! आपकी "सबसे छोटी गज़ल की याद आ गई, भाई मोहम्मद आरिफ़ जी। दिल से बधाई।

Comment by Mohammed Arif on April 25, 2018 at 4:48pm

बहुत -बहुत हार्दिक आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी ।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 25, 2018 at 10:55am

आदरणीय आरिफ मुहम्मद जी, नमस्कार । बहुत ही बढ़िया लघुकथा की प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on April 25, 2018 at 6:38am

दिली शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 24, 2018 at 9:52pm

आ.जनाब आरिफ़ साहिब आदाब, गागर में सागर यानी कम लफ़्ज़ों में ज़बरदस्त लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।

Comment by Mohammed Arif on April 24, 2018 at 6:57pm

अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से लघुकथा पर सफलता की मोहर लगाने का बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।

Comment by Mohammed Arif on April 24, 2018 at 6:55pm

आदरणीय आशुतोष जी आदाब,

                          लघुकथा पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से अवगत करवाने का बहुत-बहुत आभार ।

                     दार्शनिक और जिज्ञासु के वाद-विवाद का विषय 'दशा और 'बोध' है । दार्शनिक अंत में चींटियों के झुण्ड के माध्यम से इसका समाधान सांकेतिक रूप से करवाने का आशय ही यही है कि चींटियों जब चलती है तो एक साथ और एक ही दिशा में समूह के रूप में चलती है । उनकी अपनी एक निश्चत दिशा होती है । जब वे अनुशासनबद्ध तरीके से चलती है तब उनकी दशा देखने लायक होती है । शायद, अब आप समझ गए होंगे ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 24, 2018 at 3:52pm

आदरणीय आरिफ जी येतो लघु लघु कथा हो गयी प्रतीक का बढ़िया प्रयोग हुआ है अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर................संकेत को सुनना थोडा असमंजस में हूँ रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करी सादर 

Comment by Samar kabeer on April 24, 2018 at 2:24pm

जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,वाह बहुत खूब,शानदार लघुकथा,इस् प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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