For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जिंदगी यूँ तो लौट आएगी

पटरी पर

पर याद आएगा सफ़र का

हर मोड़

कुछ गडमड सड़कों के

हिचकोले

कुछ सपाट रस्तों पर बेवजह

फिसलना

और वक्त-बेवक्त तेरा

साथ होना |

याद आएगा  एक पेड़

घना  छाँवदार  

जिसके आसरे एक पौधा

पेड़ बना |

मौसमों की हर तीक्ष्णता का

सह वार  

पौधे को सदा दिया

ओट प्यार  |

निश्चय ही मौसम बदलने से

होगा कुछ अंकुरित  

पर वो रसाल है मेरी जड़ो में

नहीं होगा विस्मृत |

सोमेश कुमार (मौलिक एवं अमुद्रित )

 

 

 

Views: 237

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by babitagupta on July 17, 2018 at 6:13pm

अंतिम चार पंक्तियाँ कविता का पूरा निचोड़ प्रस्तुत करती हैं.बेहतरीन रचना प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीयय सोमेश सरजी।

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2018 at 5:24pm

वाह सोमेश जी बहुत सुंदर प्रस्तुति। निश्चय ही मौसम बदलने से

होगा कुछ अंकुरित

पर वो रसाल है मेरी जड़ो में

नहीं होगा विस्मृत | अति सुंदर भाव हार्दिक बधाई।

Comment by somesh kumar on July 17, 2018 at 8:55am

आदरणीय 

समर कबीर जी 

क्षमाप्रार्थी हूँ की आपके बार-बार आग्रह के बावजूद मंच पर सक्रिय अन्य मित्रों को उनकी रचना पर प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा हूँ |आग्रह है की इस तथ्य को समझें की मंच का हर सदस्य अलग-अलग परिस्थितियों और आयु-वर्ग से सम्बन्ध रखता है और उसकी यह परिस्तिथियाँ उसके पास उपलब्ध समय और उसकी साहित्यिक सक्रियता को भी प्रभावित करती हैं |छोटा बच्चा,घर-परिवार और नौकरी की जिम्मेवारियां मुझे बहुत कम समय देते हैं |

दूसरा कारण है की मेरा रुझान कहानियों(लम्बी कहानियों )की और अधिक है जबकि इस मंच पर सक्रिय मित्र गज़ल,गीत ,कविता और लघुकथा में अधिक सक्रिय है |इसलिए मैं 'प्रतिलिपि" और कहानी डॉट कोम जैसे ऑनलाइन मंचों पर भी पढ़ने-लिखने में समय देता  होता है |

इसलिए कृपया अपने इस छोटे की इस निष्क्रियता को अन्य मित्र उपेक्षा ना समझें और अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें |

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 16, 2018 at 5:55pm

बहुत सुंदर भाव मन के 

Comment by Mohammed Arif on July 16, 2018 at 4:46pm

सोमेश जी आदाब,

                अच्छी कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बात पर ध्यान दें ।

Comment by Samar kabeer on July 16, 2018 at 4:38pm

जनाब सोमेश कुमार जी आदाब, अच्छी कविता हुई है,उस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

एक निवेदन ये है कि मंच पर आपकी सक्रियत अपनी रचना तक ही सीमित है, दूसरे रचनाकार भी आपकी अमूल्य प्रतिक्रया के हक़दार हैं,उन्हें मायूस न करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार posted a blog post

व्यस्तता- लघुकथा

"अब गांव चलें बहुत दिन बिता लिए यहाँ", शोभाराम ने जब पत्नी ललिता से कहा तो जैसे उनके मुंह की बात ही…See More
55 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आ डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी"
1 hour ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आ नीता कसार जी"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का तहे दिल से शुक्रिया।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ ....
"आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुशील सरना जी , हिंदी भाषा की स्वयं अपनों के द्वारा उपेक्षा को बहुत ही सरल शब्दों चित्रित…"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

क्षणिकाएं —डॉo विजय शंकर

एक नेता ने दूसरे को धोया , बदले में उसने उसे धो दिया। छवि दोनों की साफ़ हो गई।।.......1.मातृ-भाषा…See More
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :

हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :फल फूल रही है हिंदी के लिबास में आज भी अंग्रेज़ीवर्णमाला का ज्ञान नहीं…See More
11 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post अन्तस्तल
"अपने खोए हुए को खोजती परखती सिकुड़ती इस व्यथित अचेत असहनीय अवस्था में मानों किराय का अस्तित्व लिए…"
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अगस्त 2019 – एक प्रतिवेदन   :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 24 अगस्त 2019,भाद्रपद अष्टमी दिन शनिवार,बहुत से लोगों ने इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और उसी…See More
yesterday
Gajendra Dwivedi "Girish" commented on Admin's page Tool Box
"शीर्षक : नमन वीरों को हृदय शूल को और बढ़ाकर, कैसे शमन कर पाउँगा! अपने ही प्रत्यक्ष खड़े हों, कैसे…"
yesterday
Gajendra Dwivedi "Girish" updated their profile
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service