For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"असली पहचान : नई सदी, नई मुसीबतें" (लघुकथा)

"लगता है वाक़ई बहुत गड़बड़ हो गई। कुछ ज़्यादा ही नेक साहित्य पढ़ ऊल-जलूल उसूल बना कर उलझन में डाल दिया अपनी इस शख़्सियत को!" एक मुशायरे में शामिल होने के लिए मिर्ज़ा साहिब सूटकेस जमाते हुए पिछले अनुभवों से 'सबक़' सीखने की कोशिश कर रहे थे; आजकल के हालात के हिसाब से अपने कुछ फैसले वे बदलने की सोच रहे थे।
"उस दाढ़ी वाले मुल्लाजी को रोक कर ज़रा उसकी तलाशी तो लो!" उनके पिछले अनुभव की पुनरावृत्ति करते हुए देर रात ग़श्त लगाते हुए एक पुलिस वाले ने अपने साथी को निर्देश दिया था पिछली दफ़े। मिर्ज़ा जी को आवाज़ देकर रोका गया; उनकी और उनके सूटकेस की जांच-तलाशी की गई थी। उस समय की पूछताछ याद कर आज फिर वे सिहर उठे थे।
"साहब! कुछ संदेहास्पद चीज़ें हैं!"
"क्या है?"
"तीन-चार तरह की सर ढांकने की टोपी, रंगीन बड़े से रूमाल वग़ैरह!" साहब को जवाब देते हुए पुलिसकर्मी ने कहा।
"क्यों वे दाढ़ी रखकर सभी धार्मिक-स्थलों पर क्या करता-करवाता फिरता है तू!" साहब ने थाने का डंडा घुमाते हुए भौंहें चढ़ाकर कहा था।
"साहब, मैं कोई वैसा मुल्ला-संत नहीं, एक सच्चा मुस्लिम शायर हूं; साहित्यकार हूं! हर मुसाफ़िरखाने में ठहर कर वहां के क़ायदे-नियमों का पालन करते हुए ये चीज़ें सूटकेस में जमा हैं! कहीं ठहरते वक़्त दोबारा नहीं ख़रीदनी पड़तीं! पिछले दफ़े दिल्ली के साहित्यिक सम्मेलन वास्ते वहां के गुरूद्वारे में दो-तीन दिन सहूलियत व अख़्लाक के साथ ठहरा था!"
"तुझे मालूम नहीं कि किस शक़ में तुझे संदेह के आधार पर थाने ले जाया जा सकता है! सारी शायरी जेल में घुस जायेगी!" मिर्ज़ा साहिब को डांटते हुए उसने साथी पुलिस वाले को कोई इशारा किया था।
"चलो थाने या फिर सौ का नोट जमा कर सीधे ऑटो से घर जाओ, पैदल नहीं! समझे!"
"लेकिन साहिब मैंने कोई गुनाह थोड़े न किया है गुरुद्वारे और मुसाफ़िरख़ानों में ठहर कर! ... और मैं तो पांच-सात किलोमीटर पैदल भी चल सकता हूं; मुझे पसंद है और फ़ायदेमंद भी!"
"लगता है समाचार नहीं सुनता! मज़हबी और साहित्यिक क़िताबी कीड़ा है! ... छोड़ यार इसको!" साहब ने उनसे 'पैसे लेना' ठीक नहीं समझा!
"... छोड़ रहा हूं! लेकिन ये सब धार्मिक सामान रखकर मत चला करो; ओरिजनल परिचय-पत्र और आधार कार्ड साथ में रखा करो असली पहचान के लिए! समझे!"
मिर्ज़ा साहिब ने दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए उन दोनों को घूर कर देखा था और सूटकेस थाम कर तेज़ क़दमों से चलकर ऑटो-रिक्शे वाले को पुकारने लगे थे।

यह सब याद कर इस बार 'मुसीबत' वाले सामान और क़िताबें हटाते हुए मिर्ज़ा साहिब ने  कुछ छोटा सा सूटकेस जमाया और बेगम साहिबा से विदा लेते हुए बोले - "फ़िक्र मत करना! तज़र्बेकार हूं; हिफ़ाज़त, असली पहचान और इज़्ज़त का पूरा ख़्याल रखूँगा।"


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 423

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on August 18, 2018 at 2:33pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"सर नमस्कार मुझे ग़जल का ज्ञान नहीं है  अरकान आदि को नहींं जानता हूँ। बस भव में कुछ लिख देता हूँ।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ जैसे मंच की ये स्थिति अत्यंत कष्टप्रद है। अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक विवशताओं , व्यस्ततओं…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी नहीं.. चर्चा जारी रहे।  'अभी' अलविदा ना कहना.. "
Thursday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय सौरभ भाई, आप ने सभी बातें सविस्तार कही और अनेकों संशयों को समाप्त किया। इसके पश्चात और कुछ…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"यह डेटाबेस तक पहुंच का प्रश्न है। सामान्यतः पोर्टल सर्विसेज एजेंसी साइट ओनर को डेटाबेस तक पहुंच…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता ’अजेय’ जी, आपकी संलग्नता आश्वस्तिकारी है. आपका सोचना आपके पहलू से…"
Thursday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"इस सारी चर्चा के बीच मैं एक बात और कहना चाहता हूँ। जैसा कि हम सबने देख लिया कि सदस्य इस मंच के लिए…"
Thursday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जी आदरणीय "
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
Wednesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service