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गर्द (लघु रचना ) .....

गर्द (लघु रचना ) .....

वह्म है
पोंछ देने से
आँसू
मिट जाते हैं
दर्द
मोहब्बत के शह्र में
जब उड़ती है
यादों की गर्द

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 430

Comment

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Comment by Sushil Sarna on August 24, 2018 at 3:39pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी प्रस्तुति आपकी मधुर प्रशंसा की आभारी है।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 23, 2018 at 5:53am

आ. भाई सुशील जी, बहुत खूब रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on August 21, 2018 at 5:15pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब ... सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा एवं अमूल्य सुझाव का दिल से आभार। मैं अभी एडिट करता हूँ सर। शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on August 20, 2018 at 2:25pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर लघु रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'वहम' को "वह्म" कर लें ।

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