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राखी पर कुछ कुण्डलिया

कच्चे धागों से जुड़ा, रक्षाबंधन पर्व
बहना बाँधे डोर जब, भैया करता गर्व
भैया करता गर्व, नेग बहना को देकर
प्रण जीवन रक्षार्थ, वचन खुश बहना लेकर
रेशम बाँधे प्रीत, सनातन रिश्ते सच्चे
बाँटे खुशी अपार, भले हैं धागे कच्चे।1।

सावन में बदरा घिरे, बहने लगी बयार
प्यार बाँटने आ गया, राखी का त्योहार
राखी का त्योहार, सजीं चहुओर दुकानें
ट्रांजिस्टर पर खूब, बजें राखी के गाने
जात धर्म से दूर, भाव है कितना पावन
बँधे स्नेह की डोर, मास आये जब सावन।2।

रचे ऋचाएँ स्नेह की, और मधुर उल्लास
रिश्तों के गठजोड़ को, राखी करती पास
राखी करता पास, दिलों के खोट मिटाकर
दुश्मन बनते दोस्त, पुरातन जंग भुलाकर
दीन दुुुखी के साथ, चलो यह पर्व मनाएँ
राखी का त्योहार, स्नेह की रचे ऋचाएँ।3।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on August 27, 2018 at 2:22pm

बहुत ही सुन्दर लिखी हैं।हार्दिक बधाई, आदरणीय सुरेन्द्र जी।

Comment by नाथ सोनांचली on August 27, 2018 at 1:59pm

आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफिरजी सादर अभिवादन। आपकी प्रतिक्रिया और बधाई के लिए कोटिश आभार।

Comment by नाथ सोनांचली on August 27, 2018 at 1:58pm

आद0 बबिता गुप्ता जी सादर अभिवादन। आपकी बहुमुल्यटिप्पणी के लिए आभार व्यक्त करता हूँ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 27, 2018 at 1:49pm

आ. भाई सुरेंद्र जी, सुंदर कुंडलियाँ हुयी हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by babitagupta on August 26, 2018 at 9:49pm

रक्षाबंधन पर उम्दा रचना,बधाई स्वीकार कीजियेगा,आदरणीय सरजी।

Comment by नाथ सोनांचली on August 26, 2018 at 4:15pm

आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बेहतरीन प्रतिक्रिया केलिए सादर आभार

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 26, 2018 at 2:48pm

विषयांतर्गत बढ़िया कुण्डलिया छंद सृजन हेतु सादर हार्दिक बधाई जनाब  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  साहिब।

Comment by नाथ सोनांचली on August 26, 2018 at 2:23pm

आद0 भैया डॉ छोटेलाल जी सादर अभिवादन। रचना को प्रतिक्रिया से परितोषत करने के लिए हृदय तल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 26, 2018 at 1:59pm

वाह भाई सुरेन्द्र जी बेहतरीन कुण्डलिया लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई

कृपया ध्यान दे...

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