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आशंका के गहरे-गहरे तल में

आशंका के गहरे-गहरे तल में

आयु के हज़ारों लाखों पलों के दबे ढेर में

नए कुछ पुराने दर्दों की कानों में आहट

भार वह भीतर का जो खलता था तुमको

मुझको भी

एक दूसरे को दुखी न देखने की

दर्द और न देने की मूक अभिलाषा

रोकती रही थी तुमको... कुछ कहने से

मुझको भी

पर परस्पर दर्द और न देने की इस चाह ने

बना दी है अब बीच हमारे कोई खाई गहरी

काल ने मानो सुनसान रात की गर्दन दबोच                                                     

गले पर मानो लटका दी है कोई गठरी भारी

इस सूने में बढ़ जाता है जब दर्द ज्वालामुखी-सा

सोचता हूँ अच्छा ही होता जो कोई संबंध न होता

अंधियारी रातों का उदास खड़े पेड़ों से

या... तुम्हारा मुझसे

यह चुप्पी की खाई बीच हमारे

शब्द असमर्थ हैं, लांघ नहीं पा रहे

दर्द जो तुम मुझको देने से डरती रही

घने मेघों-से वही हैं अब बढ़ते आ रहे

भार वह भीतर आशंका का बढ़ता है उबलता है

कभी सोच कभी अफ़सोस कभी फ़िक्र तुम्हारी

मैं क्या करूँ क्या न करूँ कि करने न करने से

पड़ जाए झोल कहीं हिमीभूत भविष्य में तुम्हारे

मेरी "प्यार", अच्छा है कि अब हम न ही मिलें

                       ----------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on September 25, 2018 at 8:39pm

सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीय तेज वीर सिंह जी

Comment by TEJ VEER SINGH on September 22, 2018 at 12:26pm

हार्दिक बधाई आदरणीय विजय निकोरे जी।बेहतरीन रचना।

यह चुप्पी की खाई बीच हमारे

शब्द असमर्थ हैं, लांघ नहीं पा रहे

दर्द जो तुम मुझको देने से डरती रही

घने मेघों-से वही हैं अब बढ़ते आ रहे

Comment by vijay nikore on September 9, 2018 at 5:53pm

 सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीया बबीता जी 

Comment by babitagupta on September 5, 2018 at 6:17pm

काव्यात्मक शैली माँ अपने अंतर्मन के भावों को उदगार करती रचना,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय  विजय सरजी।

Comment by vijay nikore on August 30, 2018 at 3:18pm

सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीय नरेन्द्रसिहं जी।

Comment by vijay nikore on August 30, 2018 at 3:16pm

सराहना के लिए और मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय सुशील जी।

Comment by vijay nikore on August 29, 2018 at 11:32am

भाई समर जी, रचना को आपने इतना मान दिया, हृदयतल से आभारी हूँ आपका। कृपया मनोबल बढ़ाए रखें।

Comment by vijay nikore on August 29, 2018 at 11:28am

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय लक्ष्मण जी।

Comment by vijay nikore on August 28, 2018 at 2:34pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय सुरेन्द्र जी

Comment by vijay nikore on August 28, 2018 at 2:12pm

 सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मेरे आदरणीय शेख़ उस्मानी जी।

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