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शान्ति ....

वर्तमान के पृष्ठों पर
विध्वंसकारी स्याही से
भविष्य का सृजन करने वालो
होश में आओ
विनाश की कालिख़ से
कहीं आने वाले कल का
दम न घुट जाए

तुम

नए युग के निर्माण के लिए
संगीनों को
खून की स्याही में डुबोकर
आने वाले कल का
शृंगार करते हो
और हम
पवन के पृष्ठों पर
ॐ शान्ति ॐ शान्ति ॐ शान्ति
के सुवासित सन्देश से
नव युग के निर्माण का
आह्वान करते हैं

विपरीत परिस्थितियां
विपरीत सोच
इक तरफ
जीत के जूनून में छुपा
कहीं हार का ख़ौफ़
दूसरी तरफ
जीत -हार की हदों को तोड़ता
ॐ शान्ति का सन्देश


क्या स्वीकार हो पायेगा
नव युग के निर्माण हेतु
हदों के मिलन का
ये
ॐ शान्ति का
शंखनाद

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on September 16, 2018 at 12:40pm

आदरणीय विजय निकोर जी, सादर प्रणाम .... सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on September 7, 2018 at 5:32pm

आदरणीय Naveen Mani Tripathi जी सृजन की गहनता को अपनी सहमति देती प्रतिक्रिया से अलंकृत करने का दिल से आभार।

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 7, 2018 at 4:59pm

पवन के पृष्ठों पर 

ॐ शान्ति ॐ शान्ति ॐ शान्ति 

के सुवासित सन्देश से 

नव युग के निर्माण का 

आह्वान करते हैं

वाह बहुत सुन्दर आदरणीय । अत्यंत सामयिक हस्ताक्षर ।

Comment by Sushil Sarna on September 7, 2018 at 12:46pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब ..... जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on September 7, 2018 at 12:46pm

आदरणीय मो आरिफ साहिब , आदाब .... बन्दे के सृजन को इतना आत्मीय मान देने का दिल की असीम गहराईयों से शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on September 7, 2018 at 10:23am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on September 6, 2018 at 10:29pm

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,

                             आपकी अब तक की सर्वश्रेष्ठ कविता की श्रेणी में इस कविता को रखना चाहूँगा । आज हर देश में शांति की आवश्यकता है । वैश्विक संदेश देती रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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