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समझदार बहुत होते हैं- ग़ज़ल


सब तिजारत में समझदार बहुत होते हैं
दाम कम हों तो  ख़रीदार  बहुत  होते हैं


हुस्न में इतनी कशिश है कि इसी कारण से
उनकी  नज़रों के  गिरफ़्तार  बहुत  होते हैं


कौन कहता है क़दरदान नहीं हैं उनके
नेकदिल हो तो तलबगार बहुत होते हैं


दोस्ती होती है  मज़बूत अगर जीवन में
आड़े  मौकों पे मददगार  बहुत  होते  हैं


ये तरीक़ा है अजब मुल्क में अपने देखो
बेगुनह  कम हैं  गुनहगार  बहुत होते हैं !!


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on September 6, 2018 at 11:05am

हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी। बहुत लाज़वाब गज़ल।

दोस्त कुछ आप जिंदगी में बनाये रखिये 
आड़े  मौकों  पे  मददगार  बहुत  होते  हैं

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 5, 2018 at 6:16pm

कड़वी सच्चाई और नेक सबक़ के समावेश के साथ बेहतरीन सारगर्भित ग़जल सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब विनय कुमार साहिब।

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"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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