For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


2122 2122 2122 212
भूख से मरता रहा सारा ज़माना इक तरफ़ ।
और वह गिनता रहा अपना ख़ज़ाना इक तरफ़ ।।

बस्तियों को आग से जब भी बचाने मैं चला ।
जल गया मेरा मुकम्मल आशियाना इक तरफ ।।

कुछ नज़ाक़त कुछ मुहब्बत और कुछ रुस्वाइयाँ ।
वह बनाता ही रहा दिल में ठिकाना इक तरफ ।।

ग्रन्थ फीके पड़ गए फीका लगा सारा सुखन ।
हो गया मशहूर जब तेरा फ़साना इक तरफ ।।

मिन्नतें करते रहे हम वस्ल की ख़ातिर मगर ।
और तुम करते रहे मुमक़िन बहाना इक तरफ़ ।।

हुस्न का जलवा तेरा बेइन्तिहा कायम रहा ।
और वह अंदाज भी था क़ातिलाना इक तरफ़ ।।

बात जब मतलब पे आई हो गए हैरान हम ।
रख दिया गिरवी कोई रिश्ता पुराना इक तरफ़ ।।

बेसबब सावन जला भादों जला बरसात में ।
रह गया मौसम अधूरा आशिकाना इक तरफ ।।

जब से मेरी मुफ़लिसी के दौर से वाक़िफ़ हैं वो ।
खूब दिल पर लग रहा उनका निशाना इक तरफ़ ।।

हक़ पे हमला है सियासत छीन लेगी रोटियां ।
चाल कोई चल रहा है शातिराना इक तरफ़ ।।

बे असर होने लगे हैं आपके जुमले हुजूऱ ।
आदमी भी हो रहा है अब सयाना इक तरफ़ ।।

        --नवीन मणि त्रिपाठी
         मौलिक अप्रकाशित

Views: 58

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on October 4, 2018 at 11:52am

आ0 मुसाफ़िर साहब हार्दिक आभार ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on October 4, 2018 at 11:52am

आ0 कबीर सर सादर नमन ।

सर अभी ठीक करता हूँ ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 3, 2018 at 4:37pm

आ. भाई नवीन जी,अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on October 2, 2018 at 12:15pm

जनाब नवीन जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के ऊला में 'भूँख' को "भूख" कर लें ।

छटे के ऊला में 'इन्तिहाँ' को "इन्तिहा" कर लें ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 30, 2018 at 6:40pm

आ0श्याम नारायण वर्मा जी हार्दिक आभार । 

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 30, 2018 at 6:39pm

आ0 नरेंद्र सिंह चौहान साहब हार्दिक आभार ।

Comment by narendrasinh chauhan on September 28, 2018 at 6:07pm

खूब सुन्दर रचना आदरणीय 

Comment by Shyam Narain Verma on September 28, 2018 at 12:22pm

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी प्रणाम ,बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल ....हार्दिक बधाई ! 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल ===== छोड़ कर तू.. चला गया है मुझे सबसे कहना ये भा गया है मुझे   क्या हुआ वो निभा नहीं पाया…"
34 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"एक और शानदार पेशकश के लिए मुबारकबाद जनाब समर साहब एक बात जाननी थी ...."आफ़ियत है इसी में मेरी…"
54 minutes ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब उम्दा अशआर से सजी बहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारक बाद "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"हुस्न जलवे दिखा गया है मुझे! ख़ुद से ग़ाफ़िल बना गया है मुझे ! अबरू-ए-ख़म दिखा के वो…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। मेरी इस पहली प्रविष्टि-पटल पर अपना समय देकर स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल 2 यूँ दिलासा दिया गया है मुझेतू मेरा है कहा गया है मुझे छिड़ गया होगा तज़्किरा तेराफ़ासले पर रखा…"
1 hour ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब आरिफ़ साहब खूबसूरत अशआर हुये है मुबारकबाद कूबूल करें ।"
2 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब मिर्ज़ा जावेद  साहब पिछले कुछ आयोजनों से आपकी गज़ल पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ आपके अशआर…"
2 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                  ग़ज़ल…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"बहुत बढ़िया गिरही शे'अर के साथ बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीय दण्डपाणि नाहक साहिब।"
2 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब,                 ग़ज़ल का प्रयास…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"(दूसरा प्रयास) 'ज़िन्दगी-ट्रेक' खो गया है मुझे'रेलवे-ट्रेक' खा गया है…"
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service