For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -- फ़लक में उड़ने का क़ल्बो-जिगर नहीं रखता / दिनेश कुमार

1212---1122---1212---22
.
फ़लक में उड़ने का क़ल्बो-जिगर नहीं रखता
मैं वो परिन्दा हूँ जो बालो-पर नहीं रखता
.
न चापलूसी की आदत, न चाह उहदे ( पदवी ) की
फ़क़ीर शाह के क़दमों में सर नहीं रखता
.
उरूज और ज़वाल एक से हैं जिसके लिये
वो हार जीत का दिल पर असर नहीं रखता
.
मिला नसीब से जो कुछ भी, वो बहुत है मुझे
पराई चीज़ पे मैं बद-नज़र नहीं रखता
.
नशा दिमाग़ पे दौलत का जिसके जन्म से हो
वो अपने पाँव कभी फ़र्श पर नहीं रखता
.
वो इस ज़माने के सीखेगा कैसे रीति-रिवाज
खुले जो ज़ह्न के दीवारो-दर नहीं रखता
.
ज़माने भर की उसे फ़िक्र है, मगर देखो
बशर, पड़ोसी की, अपने ख़बर नहीं रखता
.
दिनेश कुमार ( मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 267

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 20, 2018 at 4:41pm

आ. भाई दिनेश जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 18, 2018 at 12:36pm

हार्दिक बधाई आदरणीय दिनेश कुमार जी। बहुत सुंदर गज़ल।मिला

नसीब से जो कुछ भी, वो बहुत है मुझे
पराई चीज़ पे मैं बद-नज़र नहीं रखता

ज़माने भर की उसे फ़िक्र है, मगर देखो
बशर, पड़ोसी की, अपने ख़बर नहीं रखता

Comment by दिनेश कुमार on November 18, 2018 at 10:37am
बहुत शुक्रिया आ. राज़ साहब।
Comment by दिनेश कुमार on November 18, 2018 at 10:37am
बहुत शुक्रिया आ. अजय जी।
Comment by दिनेश कुमार on November 18, 2018 at 10:36am
बहुत शुक्रिया आ. समर सर। इनायत
Comment by राज़ नवादवी on November 18, 2018 at 10:34am

जनाब दिनेश कुमार जी, आदाब,सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार करें. सादर 

Comment by Ajay Tiwari on November 17, 2018 at 5:20pm

आदरणीय दिनेश जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.

Comment by Samar kabeer on November 17, 2018 at 11:27am

जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on Swastik Sawhney's blog post अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)
"जनाब स्वस्तिक जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
6 hours ago
SALIM RAZA REWA posted blog posts
6 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सदमे में है बेटियाँ चुप बैठे हैं बाप - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर, सामयिक और शिक्षाप्रद प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
13 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर प्रेरक प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया…"
19 hours ago
Usha commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय श्री लक्ष्मण जी, कविता आपको पसंद आई, ह्रदय से आपका आभार। सादर।"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार"
yesterday
Manan Kumar singh posted a blog post

अप टू डेट लोग(लघुकथा)

'भूं  भूं...भूं' की आवाज सुन भाभी भुनभुनाई-- ' भोरे भोरे कहां से यह कुक्कुड़ आ गया रे?' '  कुक्कुड़…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )

१२२२/१२२२/१२२२अमरता देवताओं  का  खजाना हैमनुज तूने कभी उसको न पाना है।१।यहाँ मुँह तो  बहुत  पर  एक…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। समसामयिक विषय पर उत्तम दोहे रचे हैं । हार्दिक बधाई।"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service