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ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार

2122---2122---2122---212
.
नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी
ग़लतियाँ राई भी हों, पर्वत बना दी जाएँगी
.
रौशनी दरकार होगी जब भी महलों को ज़रा
शह्र की सब झुग्गियाँ पल में जला दी जाएँगी
.
फिर कोई तस्वीर हाकिम को लगी है आइना
उँगलियाँ तय हैं मुसव्विर की कटा दी जाएँगी
.
इनके अरमानों की परवा अह्ले-महफ़िल को कहाँ
सुबह होते ही सभी शमएँ बुझा दी जाएँगी
.
नाम पत्थर पर शहीदों के लिखे तो जाएँगे
हाँ, मगर क़ुर्बानियाँ उनकी भुला दी जाएँगी
.
कौन मुरझाने से रोकेगा गुलों को ऐ 'दिनेश'
बुलबुलें ही बाग़ से जब सब उड़ा दी जाएँगी
.
दिनेश कुमार ( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Asif zaidi on January 22, 2019 at 5:27am

मोहतरम जनाब समर कबीर साहब आदाब बहुत शुक्रिया, ग़लती के लिए दिनेश कुमार जी से माफ़ी चाहुंगा, ओबीओ परिवार से जुड़ना सौभाग्य है,

लेकिन ऐसी ग़लती और भी हो सकती है, कारण अनुभव की कमी है,उसके लिए पेशगी माज़रत भी चाहता हूँ... सादर 

Comment by Samar kabeer on January 21, 2019 at 10:29pm

जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,ये ग़ज़ल "दिनेश कुमार" जी की है,"तुरंत" जी की नहीं है ।

दूसरी बात ये कि इस मंच पर उस्ताद शागिर्द की परंपरा नहीं है,इसलिए बराह-ए-करम मुझे उस्ताद न लिखा करें ।

Comment by Asif zaidi on January 21, 2019 at 6:08pm

मोहतरम जनाब तुरंत जी बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद!

उस्तादे-मोहतरम जनाब समर कबीर साहब के कमेंट से मुझे सीखने मिला,

आप दोनो अज़ीम हस्तीयों का बहुत शुक्रिया सादर

Comment by Balram Dhakar on December 12, 2018 at 10:01pm

आदरणीय दिनेश जी, बहुत शानदार ग़ज़ल के लिए दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं।

सादर।

Comment by मनोज अहसास on November 30, 2018 at 10:50am

हार्दिक बधाई भाई साहब

Comment by क़मर जौनपुरी on November 17, 2018 at 12:45pm

बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बहुत बहुत मुबारकबाद।

Comment by Samar kabeer on November 14, 2018 at 2:20pm

जनाब सौरभ भाई आदाब,मिज़ाज बख़ैर ।

अब आये हैं तो ब्लॉग पर जनाब श्रीपूनम जौधपुरी साहिब का नवगीत भी देख लें मुझे उस पर आपकी टिप्पणी दरकार है,कृपया कष्ट करें ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 14, 2018 at 2:10pm

भाई दिनेश जी, एक अच्च्छी ग़ज़ल से आपने पटल को समृद्ध किया है. बहुत ख़ूब. अभी पटल पर आना वाकई फल गया. 

हार्दिक बधाइयाँ 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 14, 2018 at 7:45am

आ. भाई दिनेश जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नाथ सोनांचली on November 11, 2018 at 5:15pm

आद0 दिनेश जी सादर अभिवादन,, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल, वाह वाह, बधाई स्वीकार कीजिये

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