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मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२ 

द्वार पर जो दिख रही सारी सजावट आप से है

आज अधरों पर हमारे मुस्कुराहट आप से है  

 

आपकी आमद से मौसम हो गया कितना सुहाना

जो हुई महसूस गरमी में तरावट आप से है

 

यूँ तो मेरी जिन्दगी में गम के’ सन्नाटे बहुत हैं

जो सुनाई दे रही खुशियों की’ आहट आप से  है

 

जो हृदय पाषाण था वो हो गया है पुष्प कोमल   

रेशमी अहसास की इसमें बुनावट आप से है

 

गीत, दोहे, छंद, मुक्तक या ग़ज़ल का नाम दे दो

काव्य के हर शिल्प में जो है कसावट आप से है

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by राज़ नवादवी on December 1, 2018 at 11:08am

गीत, दोहे, छंद, मुक्तक या ग़ज़ल का नाम दे दो

काव्य के हर शिल्प में जो है कसावट आप से है

वाह, आदरणीय बसंत कुमार जी, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 29, 2018 at 12:24pm

आदरणीय  Rahul Dangi जी , शुभ प्रभातम , हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by Rahul Dangi Panchal on November 27, 2018 at 9:40pm

बहुत खूब बधाई स्वीकारें

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 27, 2018 at 5:22pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी शुभ संध्या, आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 27, 2018 at 5:22pm

आदरणीय Samar kabeer जी आदाब,  आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 27, 2018 at 5:21pm

आदरणीय TEJ VEER SINGH जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 27, 2018 at 4:21pm

आ. भाई बसंत जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on November 27, 2018 at 3:50pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 27, 2018 at 11:18am

हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी। बेहतरीन गज़ल।

यूँ तो मेरी जिन्दगी में गम के’ सन्नाटे बहुत हैं

जो सुनाई दे रही खुशियों की’ आहट आप से  है

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