For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नववर्ष पर हाइकु - [हाइकु]/शेख़ शहज़ाद उस्मानी :

1-

स्वागत देख
भौंचक्का नववर्ष
बीते को देख

2-

अद्भुत हर्षा
वर्ष विदाई-रात
दुआ की बात

3-

हे नववर्ष
दुआयें बरसाता!
स्वप्न दिखाता!

4-

ख़र्चीले दिन
आते-जाते वर्ष के
दो जश्नों के!

5-

सत्य, असत्य
आते-जाते वर्ष के
मिथ्या धूम के


(छद्म धूम के)

(धूम/जश्नों)

6-

है नेतागिरी
नववर्ष-स्वागत
पुष्प व धूम

7-

सुस्वागतम
नववर्ष-शुभम
अस्माकं, त्वम्।

8-

पैसा और वक़्त
आते-जाते अतिथि
स्तंभ सशक्त

9-

लो ये भी गया,
तो नया भी आ गया
पेड़ का पत्ता

10-

यूं खिसकता!
समय न बिकता
पैसे को रोता!

11-

हो शादमानी
मुबारक ये साल
जोशीले ख़्याल!

(शादमानी = हर्ष/ख़ुशी/प्रसन्नता)

12-

दिलशाद है
नववर्ष आग़ाज़
वक़्त का साज़

(दिलशाद = हर्षित-हृदय)

13-

हर्षित हिय
नववर्ष-शुभम
स्वागत प्रिय

14-

वक़्त के फेर
लक्ष्य देर-सबेर
प्राप्त-अप्राप्त

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 514

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 3, 2019 at 2:47pm

बढ़िया आदरणीय उस्मानी जी..

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2019 at 7:42pm

आ. भाई शेख शहजाद जी, नव वर्ष पर अच्छे हाइकू हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on January 1, 2019 at 10:18am

आ0 शेख उस्मानी जी नव वर्ष पर बहुत अच्छे हाइकु प्रस्तुत किये हैं। एक हाइकु

नया ये साल

क्या लाया क्या ले गया?

उम्मीदें यादें!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 1, 2019 at 12:33am

रचना पटल पर त्वरित उपस्थिति और प्रोत्साहन हेतु सादर हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहिब।

Comment by Samar kabeer on December 31, 2018 at 3:57pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,नववर्ष की आमद पर अच्छे हाइकू लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Feb 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service