For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (जो वाकिफ़ ही नहीं नामे वफ़ा से)

ग़ज़ल (जो वाकिफ़ ही नहीं नामे वफ़ा से)
(मफाई लुन _मफाई लुन _फ ऊलन)

जो वाकिफ़ ही नहीं नामे वफ़ा सेl
लगा बैठा हूँ दिल उस दिलरुबा से l

वो बिन मांगे ही मुझको मिल गए हैं
करूँ कोई दुआ अब क्या ख़ुदा से l

झुका मुंसिफ़ भी ज़र के आगे वर्ना
बरी होता नहीं क़ातिल सज़ा से l

परायों का करूँ मैं कैसे शिकवा
मुझे लूटा है अपनों ने दगा से l

ये है फिरक़ा परस्तों की ही साज़िश
बुझा कब दीप उलफत का हवा से l

वफ़ा की कर न तू उम्मीद कोई
मुहब्बत तू ने की इक बे वफ़ा से l

दूआयें ही हैं वो तस्दीक माँ की
बचाती हैं मुझे जो हर बला से l

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 62

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 7, 2019 at 6:28pm

मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब , ग़ज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Samar kabeer on March 7, 2019 at 2:20pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

'मुहब्बत तू ने की इक बे वफ़ा से'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 5, 2019 at 2:01pm

जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 5, 2019 at 10:58am

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 5, 2019 at 9:53am

जनाब आसिफ साहिब आ दाब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 5, 2019 at 9:53am

जनाब हरि ओम साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Asif zaidi on March 4, 2019 at 11:34pm

 जनाब टी ए ख़ान साहब उम्दा ग़ज़ल मुबारकबाद मोहतरम

Comment by Hariom Shrivastava on March 4, 2019 at 10:56pm

वाह,वाहह,बहुत सुंदर ग़ज़ल

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ0 तस्दीक़ अहमद खान साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई  आपको । जहां तक मुझे जानकारी थी अभी तक फेलुन…"
16 minutes ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरनीय तन्हा जी,बहुत सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई कुबूल करें ।"
19 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय समर कबीर जी,  रातों में फिरता क्यों मुझ सा आवारा, को यदि यों कर लें ... रातों में फिरता…"
21 minutes ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरनीय समर कबीर जी,बहुत शुक्रिया"
23 minutes ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय दयाराम सर बहुत बहुत आभार। मैंने मरुथल ही लिखा है"
31 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"मुहतरम, 'मेहरबान' कोई शब्द ही नहीं है,सहीह शब्द "मह्रबान" है और इसका वज़्न 2121…"
46 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय समर कबीर जी, सलाह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। दोष दूर करने का प्रयास करुंगा। अभी तो एडिट हो…"
51 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जनाब पंकज मिश्रा जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल कुछ और समय चाहती है,बहरहाल…"
52 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जनाब समर साहिब, इस में यह कहीं नहीं लिखा है कि एक गज़ल हटा कर दूसरी नहीं रख सकते, मैं भी एक गज़ल…"
52 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय पंकज कुमार जी, सुंदर गज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई। मतले में आपने मरुथल लिखा है। मेरी जानकारी…"
56 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय अमित कुमार जी, सुंदर गज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई। दसवे शेर को आपने ।।९०।। कर दिया है। ये…"
1 hour ago
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आप का बहुत बहुत शुक्रिया"
1 hour ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service