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कुण्डलिया छंद -

बेटा-बेटी    में    करें, भेदभाव    क्यों    लोग।
सबका अपना भाग्य हैं, जब हो जिसका योग।।
जब हो जिसका योग, और प्रभु की जो मर्जी।
कौन  श्रेष्ठ  या  हेय,  धारणा  ही   ये    फर्जी।।
पुत्री  हो   या   पुत्र, नहीं   इसमें   कुछ   हेटी।
दोनों    एक    समान, आज   हैं    बेटा-बेटी।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

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Comment by नाथ सोनांचली on March 17, 2019 at 4:48pm

आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया कुण्डलिया छंद लिखा आपने। बधाई स्वीकार कीजिये। हेटी का क्या अर्थ लिया आपने क्योकि यह शब्द मुझे नया मिला

Comment by vijay nikore on March 16, 2019 at 3:19am

सुन्दर रचना के लिए बधाई, आ० हरिओम श्रीवास्तव जी

Comment by Samar kabeer on March 12, 2019 at 12:13pm

जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा कुण्डलिया छन्द लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Hariom Shrivastava on March 10, 2019 at 9:55pm

आपकी उपस्थिति व हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।

Comment by Hariom Shrivastava on March 10, 2019 at 9:53pm

आपकी उपस्थिति व हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 10, 2019 at 6:31pm

आदाब। पते की बात! बहुत सही कहा। हार्दिक बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव साहिब। //भाग्य हैं(है)//

Comment by नाथ सोनांचली on March 10, 2019 at 5:00pm

आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। अच्छी रचना पर बधाई कुबूल करें। सादर

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